मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, इंदौर (मप्र), NIT:
करीब दो माह पूर्व 23 जून 2026 को शाम 4 बजे इंदौर के विजयनगर क्षेत्र में अवैध बोरिंग के दौरान भूमिगत गैस पाइपलाइन में हुए विस्फोट की घटना में 27 प्रतिशत तक झुलसीं स्कूटर सवार राहगीर कु. जीनी झाला अब खतरे से बाहर हैं। वह अहमदाबाद स्थित ज़ाइडस अस्पताल में करीब 70 दिनों तक उपचाररत रहने के बाद 5 सितंबर 2026 को अस्पताल से डिस्चार्ज होकर अपने माता-पिता के साथ विमान से इंदौर लौटेंगी।
उल्लेखनीय है कि 30 जून 2026 तक कलेक्टर के आदेश से बोरिंग पर प्रतिबंध के बावजूद विजयनगर क्षेत्र में कथित तौर पर अवैध बोरिंग की जा रही थी। इसी दौरान भूमिगत गैस पाइपलाइन में विस्फोट होने से कु. जीनी झाला सहित पांच लोग झुलस गए थे।
कु. जीनी झाला की ओर से हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ में पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि जीनी झाला अब खतरे से बाहर हैं और उनका आगामी उपचार चिकित्सकीय सलाह के अनुसार समय-समय पर जारी रहेगा।
वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अग्रवाल के अनुसार, मूल रूप से अधिवक्ता श्री रितेश ईनाणी द्वारा प्रस्तुत रिट याचिका में पीड़िता कु. जीनी झाला की ओर से 25 जून 2026 को इंटरवेंशन याचिका प्रस्तुत की गई थी। इस पर हाईकोर्ट द्वारा 25 जून 2026 को पारित आदेश के बाद पीड़िता को तत्काल 22 घंटे के भीतर, 26 जून 2026 को एयर एंबुलेंस/हेलीकॉप्टर के माध्यम से अहमदाबाद स्थित ज़ाइडस अस्पताल ले जाया गया था। 26 जून 2026 से उनका वहीं उपचार चल रहा था।
अब करीब 70 दिनों के पीड़ादायक उपचार के बाद 5 सितंबर 2026 को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया जाएगा और वह अपने माता-पिता के साथ विमान से इंदौर लौटेंगी।
इस संबंध में अधिवक्ता श्री मनोज कुमार अग्रवाल से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मामला वर्तमान में भी हाईकोर्ट में लंबित है, इसलिए हाईकोर्ट के आदेश से संबंधित जानकारी के अलावा वह इस मामले में अधिक कुछ नहीं कह सकते। हालांकि उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि 5 सितंबर को ज़ाइडस अस्पताल से डिस्चार्ज होने के तीन दिन पूर्व, 2 सितंबर 2026 को वीडियो कॉल के माध्यम से जब उन्होंने इंदौर की बेटी कु. जीनी झाला के स्वास्थ्य की जानकारी ली, तो उनके चेहरे पर लौटी मुस्कान और आत्मविश्वास ही उनकी नजर में सबसे अनमोल अधिवक्ता फीस है।
अधिवक्ता श्री अग्रवाल ने बताया कि 23 जून 2026 की शाम करीब 4 बजे हुई घटना के संबंध में पीड़िता के भाई श्री यशवीर झाला ने उसी दिन रात करीब 8 बजे पुलिस थाने में लिखित शिकायत दी थी। उनका आरोप है कि इसके बावजूद तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की गई। पुलिस थाना विजयनगर द्वारा अगले दिन 24 जून 2026 की रात 11:58 बजे एफआईआर दर्ज की गई। अधिवक्ता के अनुसार, एफआईआर एक 21 वर्षीय युवक की मौखिक शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी, जो पीड़िता अथवा उनके परिवार का सदस्य नहीं था।
अधिवक्ता श्री अग्रवाल ने बताया कि मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद पुलिस ने पार्षद श्री बालमुकुंद सोनी को भी आरोपी बनाया है।
उन्होंने बताया कि कु. जीनी झाला के अलावा चार अन्य लोग भी इस घटना में झुलसे थे। उनके उपचार में हुआ और हो रहा संपूर्ण खर्च हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार सरकार एवं इंदौर नगर निगम द्वारा वहन किया गया है।
मामले में अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को नियत की गई है।
