रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

स्थानीय जैन तीर्थ श्री ऋषभदेव बावन जिनालय परिसर में परम पूज्य साध्वी श्री शशिकला श्री जी म.सा. की सुशिष्या परम विदुषी साध्वी श्री अविचलदृष्टा श्री जी म.सा. आदि ठाणा-7 की पावन निश्रा में 36 दिवसीय गुरुपद तप के अनुमोदनार्थ त्रिदिवसीय भक्ति महोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। महोत्सव के प्रथम दिन ‘संयम संवेदना’ का आयोजन किया गया। करीब तीन घंटे तक चले संगीतमय संयम उपकरण वंदनावली कार्यक्रम ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
श्री संघ रूनवाल ने बताया कि पूज्य साध्वी जी भगवंत के मंगलाचरण के पश्चात धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने फरमाया कि पंचम काल में चारित्र का ही वह प्रभाव है, जिससे जिन शासन जयवंत हो रहा है। संयम जीवन में उपयोग आने वाले उपकरणों के प्रतिदिन दर्शन कर उनके प्रति भावना भाने से भी चारित्र धर्म की प्राप्ति होती है, जो आत्मा को मोक्ष मार्ग की ओर ले जाता है।
प्रवचन के पश्चात प्रसिद्ध संगीतकार हर्षद भाई जैन एवं महावीर भाई (उन्हेल) की टीम ने भजनों की प्रस्तुति दी। भक्ति गीतों के बीच श्रद्धालुओं ने साधु-साध्वी भगवंतों द्वारा उपयोग किए जाने वाले 22 संयम उपकरणों एवं विभिन्न नियमों का पुण्यार्जन किया। पूज्य साध्वी जी द्वारा बताए गए इन 22 उपकरणों को लाभार्थी परिवारों ने झूमते-नाचते हुए तथा तीन प्रदक्षिणा देकर हर्षोल्लास के साथ ग्रहण किया।
प्रमुख लाभार्थी एवं नियम अंगीकार करने वाले परिवार
- पात्रा जोड़: श्री हुकमीचंदजी रमेशजी छाजेड़ परिवार।
- बड़ा पात्रा: श्री राकेशजी नैना मेहता — 15,000 गुरुमहाराज प्रदक्षिणा का नियम।
- नवकारवाली: श्री धर्मचंदजी संजयजी मेहता — 4,500 माला का नियम।
- छाब, ओर एवं डांडा (संपूर्ण उपकरण): श्री सार्थक कुमारजी राजेशकुमारजी मेहता परिवार।
- रजोहरण: श्री संजयजी एवं कविता मेहता — 601 दिन का ब्रह्मचर्य व्रत तथा श्री दीपकजी एवं सविता मुथा — 551 दिन का नियम।
- कांबली एवं रेशमी कांबली: श्री पंकजजी वेदजी कोठारी परिवार एवं श्री निशांतजी मधुकरजी शाह परिवार — 36 जोड़ पूजा कपड़ों की साधर्मिक भक्ति।
- मुंहपत्ती: श्री निशांतजी मधुकरजी शाह — 180 घंटे मौन का नियम।
- संथारा (आजीवन) पेपराल तीर्थ फ्रेम: श्रीमती सुशीलाबेन खेमसरा (लीमड़ी)।
- गुरु चादर: श्री मनोहरलालजी छाजेड़ परिवार तथा श्रीमती वीणाजी कटारिया — आजीवन गर्म पानी का नियम।
- कल्पसूत्र: तन्वीबेन (मुंबई) — 201 नई गाथाएं याद करने का नियम।
- अष्टमंगलिक: श्री पंकजजी कोठारी — 157 दिन गुरुकुलवास का नियम।
- आसन: श्री जीवनबेन पोरवाल — 51 आयंबिल का नियम।
- डंडा: श्री विवेकजी वागरेचा — 15,500 प्रदक्षिणा का नियम।
- साधु झोली: श्रीमती चंद्रकांता बेन चंद्रशेखरजी जैन (नाकोड़ा) — प्रतिदिन 5 सामायिक का नियम।
- साड़ा: श्री भरतजी जितेंद्रजी बाबेल।
- सापड़ा: श्री प्रदीपजी आशाजी कटारिया।
- पुंजणी एवं सुपड़ी: श्वेताबेन, कुक्षी।
- चोलपट्टा: श्री मुकेशजी नाकोड़ा परिवार।
- चोलपट्टा: श्रीमती सरिताजी बाबेल — 61 एकाशना का नियम।
संस्कृति, भक्ति और प्रतियोगिताओं का संगम
कार्यक्रम के दौरान संयम उपकरणों की आकर्षक सजावट श्रीमती सरिता बाबेल एवं श्रीमती सुनीता बाबेल द्वारा की गई। उनकी उत्कृष्ट सेवा के लिए चातुर्मास समिति की ओर से उनका बहुमान किया गया। पूरे आयोजन के दौरान भक्ति, संस्कृति और धार्मिक भावनाओं का सुंदर संगम देखने को मिला।
