मिर्जापुर की पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने IAS से दिया इस्तीफा, भावुक पोस्ट में लिखा, ‘13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम दिया’ | New India TimesOplus_131072

अहमद रज़ा खान, चुनार/मिर्ज़ापुर (यूपी), NIT:

मिर्जापुर की पूर्व जिलाधिकारी दिव्या मित्तल ने IAS से दिया इस्तीफा, भावुक पोस्ट में लिखा, ‘13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम दिया’ | New India Times

उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले की पूर्व जिलाधिकारी एवं आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने रविवार को अपने फेसबुक अकाउंट पर एक भावुक पोस्ट साझा कर अपने 13 वर्षों के प्रशासनिक सफर को याद किया और लोगों से मिले स्नेह एवं विश्वास के प्रति आभार जताया।
दिव्या मित्तल ने लिखा कि उन्होंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है। साधारण परिवेश में पली-बढ़ी दिव्या ने एक सफल जीवन का सपना देखा था। उन्होंने IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से शिक्षा प्राप्त करने के बाद लंदन में नौकरी की, लेकिन विदेश में रहते हुए उन्हें अपने देश से दूर होने का अहसास लगातार खलता रहा। उन्होंने लिखा कि उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताकत इसी मिट्टी का कर्ज है और इसी कर्ज को चुकाने के लिए वह भारत लौट आईं।
उन्होंने अपने प्रशासनिक कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि देवरिया ने उन्हें सही के साथ खड़े रहना और मिर्जापुर ने ‘असंभव’ को केवल एक राय समझना सिखाया। मां विंध्यवासिनी के चरणों में उन्होंने यह भी सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा और लोगों के विश्वास से मिलती है।
पूर्व जिलाधिकारी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उनके अपने सपने पूरे हो चुके थे, इसलिए इसके बाद उन्होंने लोगों के सपनों को अपना लक्ष्य बनाया। उन्होंने कहा कि जिस परिवार को पहली बार जमीन का अधिकार मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान के साथ जीने का अवसर मिला और जिस किसान के खेत तक पानी पहुंचा—उनकी खुशी में उन्हें जीवन का असली सुकून मिला।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सेवा ने उन्हें यह सिखाया कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक व्यक्ति होता है और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय है। उन्होंने अपने साथ काम करने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों का भी आभार जताते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना यह सफर संभव नहीं था।
दिव्या मित्तल ने भावुक अंदाज में लिखा कि वह यह सोचकर आई थीं कि लोगों को कुछ देने वाली हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि उन्हें लोगों से सबसे ज्यादा मिला। उन्होंने कहा कि लोगों का प्यार, सम्मान और अपनापन उनकी सबसे बड़ी पूंजी है।
पोस्ट के अंत में उन्होंने मिर्जापुर के लहुरियादह की एक वृद्ध महिला का भावुक प्रसंग साझा किया, जहां गांव में पहली बार पानी पहुंचने पर वृद्ध महिला की आंखों में दिखी खुशी उनके जेहन में हमेशा के लिए बस गई। उन्होंने लिखा कि आज आभार से उनकी आंखें नम हैं और यही यादें उनके प्रशासनिक सफर की सबसे बड़ी पूंजी हैं।

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