वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

भाई-बहन का रिश्ता केवल खून के रिश्ते तक सीमित नहीं होता, बल्कि स्नेह, विश्वास और भावनाओं से भी यह बंधन उतना ही मजबूत बन सकता है। लखीमपुर में अमर पाल सिंह और मंजू वर्मा का रिश्ता पिछले 17 वर्षों से भाई-बहन के पवित्र संबंध की अनूठी मिसाल बना हुआ है।
सदर विकासखंड लखीमपुर की ग्राम पंचायत राजापुर मजरा पिपरिया के किशोर नगर कॉलोनी निवासी अमर पाल सिंह के जीवन में अपनी कोई बहन नहीं थी। उन्हें हमेशा एक बहन की कमी महसूस होती थी। करीब 17 वर्ष पहले उनका मुड़ियाखेड़ा गांव आना-जाना हुआ। इसी दौरान उनकी मुलाकात अशोक वर्मा की पुत्री मंजू वर्मा से हुई। जब मंजू को पता चला कि अमर पाल की कोई बहन नहीं है, तो उन्होंने उन्हें अपना भाई मानते हुए उनकी कलाई पर राखी बांध दी।
मंजू के इस स्नेह और अपनत्व ने अमर पाल के जीवन की उस कमी को पूरा कर दिया। इसके बाद दोनों ने इस रिश्ते को पूरी निष्ठा और सम्मान के साथ निभाना शुरू किया।
हर रक्षाबंधन पर निभाते हैं परंपरा
17 वर्ष बीत जाने के बाद भी दोनों के बीच भाई-बहन का यह रिश्ता पहले की तरह ही मजबूत है। प्रत्येक रक्षाबंधन पर अमर पाल सिंह समय निकालकर मुड़ियाखेड़ा गांव पहुंचते हैं और अपनी बहन मंजू वर्मा से राखी बंधवाते हैं। मंजू भी पूरे स्नेह और आत्मीयता के साथ अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं।
समाज के लिए प्रेरणादायक रिश्ता
आज जब कई बार सगे रिश्तों में भी छोटी-छोटी बातों को लेकर मनमुटाव और विवाद सामने आते हैं, ऐसे समय में अमर पाल और मंजू का यह रिश्ता समाज के लिए प्रेरणा बन रहा है। बिना किसी खून के रिश्ते के केवल प्रेम, विश्वास और भावनाओं के आधार पर 17 वर्षों से भाई-बहन का फर्ज निभाना इस रिश्ते की मजबूती को दर्शाता है। स्थानीय लोग भी दोनों के इस आत्मीय और पवित्र रिश्ते की सराहना करते हैं।
