भुजलिया उत्सव में दिखी बंजारा समाज की समृद्ध संस्कृति, राणुबाई-धनियार राजा की पूजा के साथ टांडा बस्ती से हुई परंपरा की शुरुआत | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

भुजलिया उत्सव में दिखी बंजारा समाज की समृद्ध संस्कृति, राणुबाई-धनियार राजा की पूजा के साथ टांडा बस्ती से हुई परंपरा की शुरुआत | New India Times

कोयलांचल में प्रदेश के विभिन्न प्रांतों से आकर बसे लोग आज भी अपनी संस्कृति और परंपराओं को अक्षुण्ण बनाए हुए हैं। इसी की झलक बंजारा समाज के पारंपरिक भुजलिया उत्सव में देखने को मिलती है। भुजलिया पर्व के दौरान राजस्थानी संस्कृति और गणगौर पर्व की परंपराओं की झलक भी दिखाई देती है। बंजारा समाज में गणगौर की तर्ज पर भुजलिया उत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है।

हरियाली अमावस्या के दूसरे दिन से भुजलिया उत्सव की शुरुआत होती है। इस दौरान बंजारा समाज के लोग राणुबाई और धनियार राजा की पूजा-अर्चना करते हैं।

जुन्नारदेव विकासखंड की तेलीवट टांडा बस्ती में इस पर्व की विशेष रौनक देखने को मिली। हरियाली अमावस्या के दिन गांव की कुंवारी लड़कियां लोकगीत गाते हुए गांव के बाहर खेतों की मेड़ों से मिट्टी लेकर आती हैं। बांस की टोकरियों और पत्तों से बने दोनों में मिट्टी भरकर उसमें गेहूं के जवारे बोए जाते हैं। इन जवारों को सात दिनों तक नियमित रूप से पानी दिया जाता है। अंकुरित होने के बाद यही जवारे भुजलिया कहलाते हैं।

इसके बाद लड़कियां इन जवारों को टांडा के बाहर स्थित एक ओटले (चबूतरे) पर सजाती हैं। इसी ओटले पर मिट्टी से बनी राणुबाई और धनियार राजा की जोड़ी स्थापित की जाती है। कौड़ियों से उनकी आंखें और दांत बनाए जाते हैं। दोनों प्रतिमाओं को पारंपरिक वस्त्र पहनाकर गोटा-किनारी से सजाया जाता है। इसके बाद बंजारा समाज के लोग सामूहिक रूप से नृत्य करते हुए सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

तेलीवट टांडा बस्ती में यह उत्सव पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ग्रामीणों ने राजस्थानी परिधान पहनकर लोकगीतों पर नृत्य किया। लोकगीतों की मधुर धुनों के बीच ग्रामीणों ने भुजलिया की पारंपरिक रस्में निभाईं। इस दौरान हास्य-व्यंग्य के माध्यम से एक-दूसरे पर हंसी-मजाक में आरोप-प्रत्यारोप लगाने की परंपरा भी निभाई गई। करीब दो घंटे तक टांडा में उत्सव का माहौल बना रहा।

इसके बाद ग्रामीणों ने एक-दूसरे को भुजलिया भेंट कर रक्षाबंधन और भुजलिया पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर विमुक्त, घुमंतु एवं अर्द्ध-घुमंतु जनजाति प्रकोष्ठ, छिंदवाड़ा के जिला अध्यक्ष दिलीप सिंह राठौर, छोटेलाल राठौर, चुन्नीलाल राठौर, फकीरा राठौर, गोपाल नायक, दीपचंद राठौर, चैनसिंह राठौर, कलीराम राठौर, हरिप्रसाद राठौर, रामनाथ राठौर, जतन नायक, हरिसिंह राठौर, बलराम चौहान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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