मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:
बढ़ती महंगाई और आम नागरिकों की आय के बीच बढ़ते अंतर को लेकर ताप्ती सेवा समिति, बुरहानपुर ने कलेक्टर प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार का ध्यान इस गंभीर जनहित के मुद्दे की ओर आकर्षित किया।
समिति सदस्य कृष्णदास गांधी ने बताया कि ज्ञापन में खाद्य तेल, शक्कर, दाल, सब्जियां, दूध तथा अन्य दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से आम परिवारों का मासिक बजट लगातार प्रभावित होने की बात कही गई है। वहीं, आम नागरिकों की आय और रोजगार के अवसर महंगाई की गति के अनुरूप नहीं बढ़ रहे हैं।
नीति आयोग देश में उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर आर्थिक नीतियों और योजनाओं के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में महंगाई और आमदनी के बीच के अंतर का पूर्व आकलन तथा जमीनी परिस्थितियों का समय-समय पर मूल्यांकन किया जाना आवश्यक है। यदि नीतियों के बावजूद आम नागरिक की क्रय शक्ति लगातार प्रभावित हो रही है, तो यह संकेत है कि कहीं न कहीं नीतियों के क्रियान्वयन अथवा मूल्य नियंत्रण की व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।
ताप्ती सेवा समिति के संरक्षक राजीव खेडकर ने भी सवाल उठाया कि यदि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है, तो क्या जमाखोरी, कालाबाजारी और अनावश्यक मूल्यवृद्धि पर प्रभावी अंकुश लगाने में व्यवस्था पूरी तरह सफल हो पा रही है? समिति ने मांग की कि इस दिशा में कठोर निगरानी और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
वरिष्ठ सदस्य मंसुर सेवक ने कहा कि महंगाई और आमदनी के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार को उचित मूल्य की दुकानों के माध्यम से आवश्यक खाद्य वस्तुओं का तत्काल एवं प्रभावी वितरण शुरू करना चाहिए। विशेष रूप से शक्कर, खाद्य तेल, दाल एवं अन्य दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं को आम नागरिकों तक किफायती दरों पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए, ताकि बढ़ती कीमतों का सीधा बोझ आम परिवारों पर कम हो सके।
ज्ञापन में आवश्यक खाद्य वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए दीर्घकालीन नीति बनाने, खाद्य तेल और शक्कर जैसी वस्तुओं की कीमतों पर विशेष निगरानी रखने, रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने तथा मजदूरों, किसानों, छोटे व्यापारियों और निम्न एवं मध्यम आय वर्ग की क्रय शक्ति बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की गई।
समिति अध्यक्ष सरिता राजेश भगत ने कहा कि “महंगाई और आय का संतुलन ही मजबूत अर्थव्यवस्था की वास्तविक पहचान है।” उन्होंने कहा कि समय-समय पर आय बनाम महंगाई के प्रभाव का आकलन कर नीतियों में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।
वहीं, समिति उपाध्यक्ष प्रेमलता सांकले ने स्पष्ट किया कि यह ज्ञापन किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं, बल्कि आम नागरिकों की आर्थिक परेशानियों और उनकी आवाज को नीति-निर्माताओं तक पहुंचाने के उद्देश्य से दिया गया है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान सचिव धर्मेंद्र सोनी, नंदकिशोर वाणे, श्रीमती आशा तिवारी, रियाज उल हक अंसारी, विनय पुनीवाला, देवचरण शर्मा, डॉ. यूसुफ खान, मोहन दलाल, कृष्णदास गांधी, राजेश भगत, सचिन सोनगिरकर सहित समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
समिति ने अपनी मांग को स्पष्ट शब्दों में दोहराते हुए कहा—
“महंगाई घटाओ या आय बढ़ाओ, जनता को आर्थिक राहत दिलाओ!”
