वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

बेहतर इलाज की तलाश में लखनऊ के अस्पतालों के चक्कर लगा रहे एक मरीज को आखिरकार अपने गृह जनपद में ही राहत मिली। लखीमपुर मेडिकल कॉलेज के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने करीब एक माह की जांच और चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद गले में मौजूद बड़ी और जटिल गांठ की सफल सर्जरी कर मरीज को स्वस्थ कर दिया।

गले में तेज दर्द और बड़ी गांठ की समस्या से परेशान मरीज इलाज के लिए लखनऊ के कई अस्पतालों में गया, लेकिन उसे अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसके बाद वह लखीमपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचा। यहां ईएनटी (नाक, कान एवं गला) विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज शर्मा ने प्राथमिक परीक्षण के बाद मामले की गंभीरता को समझते हुए आवश्यक जांच कराई।
करीब एक माह तक मरीज के विभिन्न परीक्षण और विस्तृत चिकित्सकीय मूल्यांकन किए गए। गांठ का आकार बड़ा होने के साथ ही उसके संवेदनशील नसों और महत्वपूर्ण संरचनाओं के निकट होने के कारण सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी। जांच के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों ने ऑपरेशन करने का निर्णय लिया।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ जनरल सर्जन डॉ. आर.के. कोली तथा ईएनटी सर्जन डॉ. मनोज शर्मा की संयुक्त टीम ने सावधानीपूर्वक सर्जरी करते हुए गांठ को सफलतापूर्वक बाहर निकाल दिया। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव या किसी अन्य गंभीर जटिलता की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।
टीबी की आशंका के बाद कराई गई विशेष जांच
ईएनटी सर्जन डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि मरीज लखनऊ की कुछ पुरानी रिपोर्टों के साथ मेडिकल कॉलेज आया था। एक जांच में गांठ के टीबी से संबंधित होने की आशंका जताई गई थी, जिससे स्थिति स्पष्ट नहीं थी।
उन्होंने बताया कि गांठ की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अल्ट्रासाउंड, यूएसजी-गाइडेड एफएनएसी तथा गांठ के अंदर मौजूद पदार्थ की CBNAAT जांच कराई गई। जांच में टीबी की पुष्टि नहीं हुई। टीबी की गांठ और सामान्य सिस्ट के उपचार की प्रक्रिया अलग-अलग होती है, इसलिए ऑपरेशन से पहले इन जांचों को आवश्यक माना गया।
जांच और मरीज के लक्षणों के आधार पर गांठ के डर्मॉइड सिस्ट होने की आशंका थी। यह गांठ थायरॉयड कार्टिलेज के क्षेत्र से शुरू होकर रेट्रोस्टर्नल क्षेत्र तक फैली हुई थी। इसी आधार पर सावधानीपूर्वक सर्जरी कर गांठ को निकाला गया। अंतिम पुष्टि के लिए गांठ के नमूने को पैथोलॉजिकल जांच के लिए भेजा गया है।
डॉ. मनोज शर्मा,
असिस्टेंट प्रोफेसर, ईएनटी विभाग, लखीमपुर मेडिकल कॉलेज।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक एवं वरिष्ठ जनरल सर्जन डॉ. आर.के. कोली ने बताया कि गांठ थायरॉयड कार्टिलेज के साथ-साथ श्वासनली के निकट भी जुड़ी हुई थी। इसे अत्यंत सावधानी और जटिल सर्जिकल प्रक्रिया के माध्यम से निकाला गया। इस दौरान श्वासनली तथा मस्तिष्क को रक्त पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाओं को सुरक्षित रखा गया।
उन्होंने कहा कि स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध जिला चिकित्सालय लखीमपुर खीरी इस प्रकार के जटिल मामलों में मरीजों को उन्नत जांच और बेहतर उपचार सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है।
ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति सामान्य बताई गई है और वह चिकित्सकों की निगरानी में स्वस्थ है।
