त्रिवेंद्र जाट, सागर/भोपाल (मप्र), NIT:

भारतीय जनता पार्टी द्वारा संत शिरोमणि गुरु रविदास जी महाराज के नाम पर चलाए जा रहे समरसता संकल्प अभियान पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी अनुसूचित जाति विभाग की राष्ट्रीय सलाहकार परिषद के सदस्य एवं पूर्व मंत्री सुरेंद्र चौधरी ने निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा का यह अभियान सामाजिक समरसता के बजाय आगामी नगरीय निकाय एवं पंचायती राज चुनावों को ध्यान में रखकर अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के बीच संत-महात्माओं के नाम का राजनीतिक उपयोग करने का प्रयास है।
चौधरी ने कहा कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भी भाजपा ने गुरु रविदास जी महाराज के मंदिर निर्माण के नाम पर यात्रा शुरू कर राजनीतिक प्रचार किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में अनुसूचित जाति अंत्यव्यवसायी वित्त विकास निगम के माध्यम से संत रविदास जी महाराज एवं अन्य संत-महात्माओं के नाम से शुरू की गई योजनाओं को चुनाव के बाद बंद कर दिया गया। अब चुनाव नजदीक आते ही भाजपा को फिर संत रविदास जी और संत-महात्माओं की याद आने लगी है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि संत रविदास जी का संदेश सामाजिक समानता, मानवता, आत्मसम्मान और भेदभावमुक्त समाज की स्थापना का था। इसके बावजूद मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के साथ अन्याय, अत्याचार और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर संविधान निर्माता भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं को क्षति पहुंचाने और उनके साथ छेड़छाड़ की घटनाएं भी सामने आई हैं, लेकिन सरकार इन पर प्रभावी रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रही है।
चौधरी ने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में संत रविदास जी और संत-महात्माओं के विचारों का सम्मान करती है तो उसे सामाजिक न्याय, समान अवसर, अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग की सुरक्षा, शिक्षा, रोजगार और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। केवल चुनाव के समय संतों और महापुरुषों के नाम पर अभियान चलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश बंद होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी संत रविदास जी महाराज के विचारों, डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों तथा सामाजिक न्याय, समानता और बंधुत्व के संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
