मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

विकास के दावों के बीच जुन्नारदेव क्षेत्र के दमुआ अंतर्गत चीटीपाठा-जामुनडोंग टोले से एक दर्दनाक मामला सामने आया है। गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण प्रसव पीड़ा से कराह रही गर्भवती महिला को परिजन और ग्रामीण करीब 8 किलोमीटर तक डोली में लादकर अस्पताल के लिए ले गए। अस्पताल पहुंचने में हुई देरी के बाद नवजात की मौत हो गई, जबकि महिला को गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती किया गया है।
जानकारी के अनुसार सोनू मलगाम की पत्नी कुस्तरिया को गुरुवार सुबह प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गांव तक सड़क नहीं होने और एंबुलेंस के नहीं पहुंच पाने के कारण परिजनों एवं सरपंच ने ग्रामीणों की मदद से महिला को डोली में बैठाकर करीब 8 किलोमीटर पथरीले रास्ते से गोप तक पहुंचाया। इसके बाद 108 एंबुलेंस की मदद से महिला को दमुआ ले जाया गया, जहां से चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
ग्रामीणों का आरोप है कि करीब 125 घरों वाले इस टोले में आज भी पक्की सड़क और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। ग्रामीणों के मुताबिक सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2016 से प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है। ग्रामीणों का यह भी दावा है कि सड़क के अभाव में उपचार के लिए समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण इससे पहले तीन महिलाओं की मौत हो चुकी है।
नवजात की मौत के बाद ग्रामीणों में आक्रोश है। घटना ने क्षेत्र में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव तक सड़क और समय पर एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध होती तो शायद महिला को इस तरह 8 किलोमीटर तक डोली में ले जाने की नौबत नहीं आती।
