अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:
भोपाल के नारियल खेड़ा क्षेत्र में निजी भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ जिला प्रशासन और नगर निगम ने बड़ी कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल की मौजूदगी में अवैध रूप से बनाए गए मकानों और दुकानों को हटाया गया।
बताया जा रहा है कि 65 वर्षीय उपासना जौहरी करीब 35 वर्षों से अपनी निजी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए प्रयासरत थीं। वर्ष 1992 में सिविल न्यायालय ने उनके पक्ष में डिग्री भी पारित की थी। इसके बावजूद करीब 78 डेसीमल भूमि पर विभिन्न लोगों ने अतिक्रमण कर मकान और दुकानें बना ली थीं।
प्रकरण का संज्ञान लेते हुए कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बुजुर्ग महिला को न्याय दिलाने के लिए उपखंड अधिकारी राजस्व और तहसीलदार बैरागढ़ को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए थे। न्यायालय और कलेक्टर के आदेश के परिपालन में ग्राम निशातपुरा में करीब 20 करोड़ रुपये मूल्य की 37 डेसीमल निजी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया।
प्रशासन की कार्रवाई के दौरान 23 मकानों और 25 दुकानों को हटाया गया। मौके पर नगर निगम का अमला और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। कार्रवाई के चलते क्षेत्र में काफी हलचल का माहौल बना रहा। कॉलोनी के रहवासियों में खासा गुस्सा, नाराज़गी और विरोध देखने को मिला। रहवासियों का कहना है कि वे पिछले करीब 40 वर्षों से यहां रह रहे हैं। उनका दावा है कि उन्होंने मकान खरीदे हैं, किसी जमीन पर अवैध कब्जा नहीं किया। इसके बावजूद उनके मकानों को तोड़ने की कार्रवाई की जा रही है।
रहवासियों ने कहा कि वे नियमित रूप से संपत्तिकर, जलकर और बिजली के बिल का भुगतान करते आ रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा अचानक मकान तोड़ने की कार्रवाई समझ से परे है। रहवासियों ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर यह कैसा न्याय है? बारिश के मौसम में यदि उनके सिर से छत छिन जाएगी तो वे अपने परिवार और छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएंगे।कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों का विस्थापन कैसे होगा और उन्हें कहां बसाया जाएगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
वहीं प्रशासन का कहना है कि न्यायालय के आदेशों के पालन में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई है। लंबे समय से अपनी जमीन के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रही 65 वर्षीय उपासना जौहरी के लिए यह कार्रवाई करीब 35 साल बाद इंसाफ मिलने के रूप में सामने आई है।
