गणेश मौर्य, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:

कब्रिस्तान और सार्वजनिक तालाब की जमीन पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय लोगों ने संबंधित भूमि की निष्पक्ष जांच कराकर यदि निर्माण अवैध पाया जाए तो उसे हटाने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
मामले को लेकर आरोप लगाए जा रहे हैं कि विवादित जमीनों पर प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत से कब्जा कर दुकानें व अन्य निर्माण कराए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि कब्रिस्तान की भूमि धार्मिक आस्था से जुड़ी है, जबकि तालाब की जमीन सार्वजनिक उपयोग और जल संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। ऐसे में किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा गंभीर मामला है।
वहीं, पूरे प्रकरण में पत्रकार और सैयद मंजर के बीच कथित रंगदारी के आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए हैं। दोनों पक्षों के दावों की जांच निष्पक्ष तरीके से किए जाने की मांग की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को आरोप-प्रत्यारोप से अलग हटकर राजस्व अभिलेखों और मौके की पैमाइश के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
लोगों की निगाह अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। यदि जांच में कब्रिस्तान या तालाब की जमीन पर अवैध निर्माण की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार अतिक्रमण हटाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।

