वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

पौराणिक एवं धार्मिक महत्व के देवकली तीर्थस्थल पर आगामी 17 अगस्त 2026, सोमवार को श्रावण शुक्ल पंचमी यानी नागपंचमी के अवसर पर सामूहिक कालसर्प योग शांति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है और दूर-दराज क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
आयोजक महंत प्रमोद जी महाराज, श्रीमती चंद्रकला आश्रम एवं संस्कृत विद्यापीठ, देवकली के अनुसार कालसर्प योग को ज्योतिषीय मान्यताओं से जोड़कर देखा जाता है। जन्मकुंडली में इस योग से संबंधित दोष बताए जाने पर अनेक लोग शांति अनुष्ठान कराते हैं। इसी उद्देश्य से नागपंचमी के पावन अवसर पर देवकली तीर्थ परिसर में सामूहिक महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है।
आयोजकों के मुताबिक महायज्ञ में धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना, मंत्रोच्चार सहित विभिन्न वैदिक कर्मकांड संपन्न कराए जाएंगे। श्रद्धालुओं को धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण में पूजा-अर्चना करने का अवसर मिलेगा।
पौराणिक मान्यताओं से जुड़ा है देवकली तीर्थ
देवकली तीर्थस्थल को स्थानीय धार्मिक परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि यह स्थल राजा जनमेजय के सर्प यज्ञ से जुड़ी पौराणिक परंपराओं का साक्षी रहा है। इसी कारण नागपंचमी के अवसर पर यहां होने वाले धार्मिक आयोजन का विशेष महत्व माना जाता है। आयोजन के दौरान द्वादश ज्योतिर्लिंगों और अन्य धार्मिक परंपराओं से जुड़े प्रसंगों की भी जानकारी श्रद्धालुओं को दी जाएगी।
आयोजकों ने कालसर्प योग शांति महायज्ञ में शामिल होने के इच्छुक श्रद्धालुओं से निर्धारित समय पर देवकली तीर्थ पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता करने की अपील की है।
