सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप: अकबरपुर में 4 बीघा 10 बिस्वा के तालाब की जमीन अभिलेखों में बदली, अवैध प्लॉटिंग का भी दावा | New India Times

गणेश मौर्या, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:

सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप: अकबरपुर में 4 बीघा 10 बिस्वा के तालाब की जमीन अभिलेखों में बदली, अवैध प्लॉटिंग का भी दावा | New India Times

पर्यावरण संरक्षण और जल निकायों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद अंबेडकरनगर जिले के अकबरपुर क्षेत्र में एक ऐतिहासिक तालाब की भूमि के राजस्व अभिलेखों में कथित रूप से बदलाव किए जाने का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजस्व ग्राम फतेहपुर पकड़ी की भूमि से संबंधित अभिलेखों में हेरफेर कर तालाब की जमीन को अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज कर दिया गया और मौके पर भी भूमि पर प्लॉटिंग तथा निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

1359 फसली में तालाब के रूप में दर्ज होने का दावा

स्थानीय लोगों द्वारा उपलब्ध कराए गए राजस्व अभिलेखों के अनुसार गाटा संख्या 455, जिसका रकबा करीब 4 बीघा 10 बिस्वा बताया जा रहा है, 1359 फसली में तालाब की श्रेणी में दर्ज था। आरोप है कि बाद के राजस्व अभिलेखों में इस भूमि की श्रेणी में परिवर्तन कर इसे अलग-अलग गाटों में दर्ज किया गया।

बताया गया है कि गाटा संख्या 455 मिं. में संक्रमणीय भूमिधर के रूप में 0.1140 हेक्टेयर भूमि दर्ज है, जबकि गाटा संख्या 455/1 में श्रेणी-4 के अंतर्गत अंतू पुत्र भरोस के नाम 0.977 हेक्टेयर तथा गाटा संख्या 455/2 में श्रेणी-5 के अंतर्गत राम भरोस पुत्र देवी का नाम दर्ज होने की बात कही जा रही है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के चलते जिस भूमि को पूर्व में तालाब के रूप में दर्ज किया गया था, उसका स्वरूप राजस्व अभिलेखों में बदल गया।

तालाब की भूमि पर प्लॉटिंग और निर्माण का आरोप

आरोप है कि राजस्व अभिलेखों में बदलाव के बाद मौके पर तालाब की भूमि को धीरे-धीरे पाटकर प्लॉटिंग की जा रही है। कुछ स्थानों पर मकान और बाउंड्रीवॉल बनाए जाने का भी दावा किया गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि सार्वजनिक जल निकाय की भूमि पर वास्तव में अवैध कब्जा और निर्माण हुआ है तो इससे क्षेत्र के जल संरक्षण और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और राजस्व अभिलेखों की पुराने रिकॉर्ड से जांच कराने की मांग की है।

प्रशासन की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

मामले को लेकर स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों में नाराजगी बताई जा रही है। उनका कहना है कि यदि जांच में तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा, अभिलेखों में अनियमितता या नियमविरुद्ध निर्माण की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कब कराएगा? क्या राजस्व अभिलेखों में कथित बदलाव की जांच कर जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाएगी? क्या मौके पर हुए निर्माण और प्लॉटिंग की भी जांच होगी? और यदि जांच में सरकारी या सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे की पुष्टि होती है, तो क्या प्रशासन उसे हटाकर तालाब की भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल कराएगा?

इन सवालों के जवाब अब जिला प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर निर्भर हैं।

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