निहाल चौधरी, इटवा/सिद्धार्थ नगर (यूपी), NIT:
इटवा क्षेत्र के ग्राम भदोखर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर मरीजों और तीमारदारों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले कई महीनों से अस्पताल की जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित है, जिससे मरीजों के साथ-साथ स्वास्थ्यकर्मियों को भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी की सप्लाई का पाइप टूट जाने तथा अन्य तकनीकी खराबी के कारण अस्पताल में नियमित रूप से पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। अस्पताल परिसर के बाहर लगे सार्वजनिक नल भी लंबे समय से बंद पड़े हैं। इसके चलते पीने के पानी से लेकर शौचालयों की सफाई तक की व्यवस्था प्रभावित हो गई है।
बताया जा रहा है कि अस्पताल के महिला एवं पुरुष शौचालयों तथा वॉशरूम की स्थिति बेहद खराब हो चुकी है। पानी की उपलब्धता नहीं होने के कारण शौचालयों का उपयोग करना मुश्किल हो गया है। अस्पताल आने वाले मरीजों को शौचालय के उपयोग के लिए अस्पताल परिसर से बाहर जाना पड़ता है, जिससे इलाज के दौरान उन्हें काफी असुविधा होती है।
अस्पताल कर्मियों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक इसका कोई स्थायी समाधान नहीं कराया गया है। लंबे समय से समस्या जस की तस बनी रहने के कारण लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
केवल जलापूर्ति ही नहीं, बल्कि अस्पताल परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि बाउंड्रीवॉल के अंदर लंबे समय से नियमित सफाई नहीं होने के कारण झाड़ियां फैल गई हैं। इसके चलते परिसर में अक्सर सांप, बिच्छू तथा अन्य जहरीले कीड़े दिखाई देते हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों में भय का माहौल बना हुआ है। लोगों का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर इस प्रकार की स्थिति किसी बड़े हादसे को जन्म दे सकती है।
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य आम नागरिकों को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन भदोखर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की वर्तमान स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति, शौचालयों की सफाई और अस्पताल परिसर की नियमित देखरेख की व्यवस्था नहीं की गई, तो मरीजों को और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।
अब सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेकर जल्द इसका समाधान कराएंगे, या फिर मरीजों और कर्मचारियों को इसी तरह बदहाल व्यवस्था के बीच इलाज और सेवाएं लेने को मजबूर रहना पड़ेगा?
