जमशेद आलम, भोपाल/नई दिल्ली, NIT:

राजधानी के जंतर-मंतर पर छात्र-युवा प्रदर्शन के दौरान अचानक सुर्खियों में आए एक साधारण मजदूर मोहम्मद इरफान अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में इरफान ने भावपूर्ण अंदाज में संविधान की प्रस्तावना पढ़ते हुए मजदूरों और गरीब तबके की पीड़ा को आवाज दी, जिसने लाखों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
करीब 35 वर्षीय मोहम्मद इरफान दिल्ली की एक झुग्गी-झोपड़ी बस्ती में अपने परिवार के साथ एक कमरे के मकान में रहते हैं। औपचारिक शिक्षा न होने के बावजूद उन्होंने सुनकर और तकनीक की मदद से संविधान, कविताएं और सामाजिक मुद्दों की समझ विकसित की है। जीविका के लिए वे हाथगाड़ी चलाने और बर्फ बेचने का काम करते हैं, जिससे उन्हें रोजाना करीब 500 रुपये की आमदनी होती है।
NEET पेपर लीक समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे प्रदर्शन के दौरान इरफान का संबोधन वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने संविधान, समान अवसर और मजदूरों के अधिकारों पर जोर दिया। उन्होंने मशहूर कवियों की रचनाएं भी सुनाकर अपनी बात प्रभावी ढंग से रखी।
इसी बीच 27 जुलाई 2026 को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इरफान के घर पहुंचकर उनसे और उनके परिवार से मुलाकात की। इस दौरान मजदूरों की समस्याओं, शिक्षा और संवैधानिक अधिकारों पर चर्चा हुई, जबकि प्रियंका गांधी भी फोन के माध्यम से बातचीत में शामिल रहीं।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर इरफान की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे जागरूक और संवेदनशील युवा देश की असली ताकत हैं। उन्होंने इरफान के संविधान के प्रति ज्ञान और दृष्टिकोण को उनकी परिस्थितियों से कहीं ऊपर बताया।
यह मुलाकात केवल एक वायरल चेहरे तक सीमित नहीं, बल्कि उन लाखों मेहनतकश लोगों की आवाज का प्रतिनिधित्व करती है, जो कठिन हालात में भी लोकतंत्र और संविधान में अटूट विश्वास रखते हैं।
