मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:
मध्यप्रदेश सरकार आगामी विधानसभा सत्र में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) से संबंधित विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। इसी क्रम में रविवार को जगदीशपुर में UCC को लेकर विशेष कैबिनेट बैठक आयोजित की गई। बताया जा रहा है कि सरकार मानसून सत्र में UCC विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने तथा अन्य पारिवारिक मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। यदि यह कानून लागू होता है, तो सभी धर्मों के लिए विवाह पंजीकरण अनिवार्य हो सकता है। तलाक केवल न्यायालय द्वारा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही मान्य होगा। वैधानिक तलाक के बिना दूसरी शादी करना अपराध की श्रेणी में आ सकता है, जिससे महिलाओं के अधिकारों को अधिक कानूनी संरक्षण मिलेगा।
मुस्लिम पसमांदा समाज के जिला अध्यक्ष आरिफ शाह ने कहा कि UCC का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार दिलाना है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों, जातियों और संस्कृतियों की परंपराओं का सम्मान करते हुए विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों से संवाद के बाद ही कानून लागू किया जाना बेहतर होगा।
वहीं, लॉ कॉलेज की विधि छात्रा तबस्सुम निशा ने कहा कि UCC लागू होने पर मुस्लिम महिलाओं को विवाह, तलाक, भरण-पोषण और संपत्ति के मामलों में अधिक समान एवं मजबूत कानूनी अधिकार मिल सकते हैं। उनके अनुसार पति-पत्नी दोनों के अधिकार और जिम्मेदारियां समान रूप से निर्धारित हो सकती हैं तथा तलाक की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और न्यायिक निगरानी में होगी।
उन्होंने कहा कि तलाकशुदा या परित्यक्त महिलाओं को भरण-पोषण का बेहतर कानूनी संरक्षण मिलेगा, जिससे उनकी आर्थिक सुरक्षा बढ़ेगी। यदि UCC में समान उत्तराधिकार के प्रावधान शामिल होते हैं, तो महिलाओं को संपत्ति में पुरुषों के बराबर अधिकार मिलने की संभावना है।
तबस्सुम निशा ने कहा कि बाल विवाह और बहुविवाह जैसे मुद्दों पर समान कानून लागू होने से महिलाओं के अधिकार अधिक सुरक्षित होंगे। अलग-अलग पर्सनल लॉ के स्थान पर एक समान कानून होने से न्यायिक प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत सरल हो सकती है।
उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों के लिए एक समय में केवल एक ही वैध विवाह मान्य होगा। पहली पत्नी के रहते दूसरी शादी करने पर दूसरी शादी अवैध मानी जा सकती है और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई संभव होगी। पहली पत्नी अपने वैवाहिक अधिकार, भरण-पोषण, निवास और अन्य कानूनी राहत आसानी से प्राप्त कर सकेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पति पत्नी को छोड़ देता है, तो पत्नी अदालत से अपने और बच्चों के भरण-पोषण की मांग कर सकती है। UCC लागू होने पर पत्नी और बच्चों के संपत्ति संबंधी अधिकार अधिक स्पष्ट और सुरक्षित हो सकते हैं। साथ ही, पति केवल मौखिक घोषणा करके विवाह समाप्त नहीं कर सकेगा, बल्कि तलाक कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।
हालांकि, भारत में मुस्लिम महिलाओं के लिए तत्काल तीन तलाक पहले ही कानून द्वारा अमान्य घोषित किया जा चुका है। तबस्सुम निशा ने कहा कि यदि UCC में एक-विवाह और समान वैवाहिक अधिकारों के प्रावधान शामिल किए जाते हैं, तो बिना तलाक दिए दूसरी शादी जैसी परिस्थितियों में पहली पत्नी को अधिक मजबूत कानूनी संरक्षण और न्याय मिलने में सुविधा होगी। उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने और किसी के दबाव में आकर जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय न लेने की अपील की।
