समय पर इलाज से बचा 15 वर्षीय राहुल का पैर, प्रशासन और डॉक्टर की पहल बनी नई उम्मीद | New India Times

मुबारक अली, ब्यूरो चीफ, शाहजहांपुर (यूपी), NIT:

कभी-कभी समय पर उठाया गया एक कदम किसी की पूरी जिंदगी बदल देता है। गढ़िया रंगीन निवासी 15 वर्षीय राहुल के साथ भी ऐसा ही हुआ। तीन महीने पहले दीवार गिरने से उसके दाएं पैर में गंभीर चोट लग गई थी। समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण घाव में संक्रमण बढ़ता गया और स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पैर बचाना मुश्किल माना जाने लगा।

राहुल के माता-पिता नहीं हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति भी बेहद कमजोर है। इलाज की उम्मीद में परिजन अपर जिलाधिकारी अरविंद कुमार के पास पहुंचे। राहुल की गंभीर हालत को देखते हुए उन्होंने तत्काल उसे बेहतर उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज भेजने और आवश्यक चिकित्सा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

परिजनों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज में प्रारंभिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने संक्रमण अधिक होने के कारण पैर काटने की आशंका जताई। यह सुनकर परिवार निराश हो गया और आर्थिक तंगी के चलते राहुल को वापस गांव ले आया।

इसी दौरान राहुल की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से वरिष्ठ सर्जन एवं समाजसेवी डॉ. के.पी. गुप्ता (अर्नव सर्जिकेयर हॉस्पिटल) तक पहुंची। उन्होंने बिना देर किए परिवार से संपर्क किया और 23 जून 2026 को राहुल को अस्पताल में भर्ती कर उसका उपचार शुरू कराया।

लगातार उपचार, नियमित ड्रेसिंग और चिकित्सकीय निगरानी का सकारात्मक परिणाम सामने आया। अब राहुल के पैर का संक्रमण काफी हद तक नियंत्रित हो चुका है, घाव तेजी से भर रहा है और वह अपने पैरों के सहारे चलने-फिरने लगा है।

डॉ. के.पी. गुप्ता ने बताया कि घाव आधे से अधिक भर चुका है। शेष उपचार पूरा होने के बाद आवश्यक प्लास्टिक सर्जरी की जाएगी, ताकि पैर को यथासंभव सामान्य स्थिति में लाया जा सके।

राहुल के परिजनों ने डॉ. गुप्ता की निःस्वार्थ सेवा की सराहना करते हुए कहा कि समय पर मिले उपचार ने उनके बच्चे का पैर बचाने की नई उम्मीद जगा दी। वहीं, डॉ. के.पी. गुप्ता ने इस प्रयास का श्रेय अपर जिलाधिकारी अरविंद कुमार और मीडिया कर्मियों को दिया। उनका कहना है कि यदि मामला समय रहते उनके संज्ञान में नहीं आता, तो राहुल की मदद कर पाना संभव नहीं हो पाता।

यह घटना साबित करती है कि जब प्रशासन, मीडिया और चिकित्सक संवेदनशीलता के साथ मिलकर कार्य करते हैं, तो असंभव लगने वाली परिस्थितियों में भी नई उम्मीद पैदा हो जाती है।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version