संदीप तिवारी, ब्यूरो चीफ, पन्ना (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में दवा एजेंसियों की आड़ में ऑनरेक्स कफ सिरप की संदिग्ध आपूर्ति का मामला सामने आया है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन की विशेष जांच में खुलासा हुआ कि जिले की दो दवा एजेंसियों ने महज दो से तीन माह के भीतर करीब 1 लाख 34 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप खरीदीं, लेकिन उनकी बिक्री, वितरण और चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन से संबंधित अनिवार्य रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सकीं। जांच के दौरान एक एजेंसी का संचालक प्रतिष्ठान बंद कर परिवार सहित गायब मिला, जिसके बाद दोनों एजेंसियों को सीलबंद कर दिया गया। मामले में वैधानिक कार्रवाई जारी है।

नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, मध्य प्रदेश, भोपाल के निर्देश तथा पन्ना कलेक्टर के मार्गदर्शन में गठित विशेष जांच दल ने 3 से 5 जुलाई 2026 तक जिले में व्यापक जांच अभियान चलाया। जांच के दौरान ग्राम कटन, तहसील गुनौर स्थित मेसर्स बागरी ड्रग एजेंसी द्वारा पिछले लगभग एक माह में खरीदी गई 45 हजार ऑनरेक्स कफ सिरप की बोतलों का बिक्री एवं वितरण रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया जा सका। निरीक्षण में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 तथा नियम, 1945 के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर एजेंसी को तत्काल प्रभाव से सीलबंद कर दिया गया।
इसी क्रम में देवेंद्रनगर स्थित मेसर्स देवनाथ फार्मा की जांच में सामने आया कि एजेंसी लाइसेंस में दर्ज स्थान के बजाय दूसरे स्थान से संचालित हो रही थी। यहां पिछले दो माह में करीब 89 हजार बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप खरीदे जाने का रिकॉर्ड मिला। लगातार दो दिन तक जांच के बाद तीसरे दिन टीम जब दोबारा पहुंची तो प्रतिष्ठान बंद मिला और संचालक परिवार सहित गायब था। इसके बाद नियमानुसार इस एजेंसी को भी सीलबंद कर दिया गया।
दोनों एजेंसियां इतनी बड़ी मात्रा में खरीदे गए ऑनरेक्स कफ सिरप की बिक्री, वितरण और चिकित्सकीय प्रिस्क्रिप्शन का वैध रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं कर सकीं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर करीब 1.34 लाख बोतल ऑनरेक्स कफ सिरप कहां और किन लोगों को उपलब्ध कराया गया। यही अब जांच का सबसे महत्वपूर्ण विषय बन गया है।
कफ सिरप का चिकित्सकीय उपयोग पूरी तरह वैध है, लेकिन लंबे समय से इसके कुछ प्रकारों के नशे के रूप में दुरुपयोग की शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में इतनी बड़ी मात्रा में खरीद, रिकॉर्ड का अभाव और एक एजेंसी संचालक का परिवार सहित गायब हो जाना पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि दवा वास्तविक मरीजों तक पहुंची या उसका अवैध उपयोग किया गया।
इस कार्रवाई के बाद पन्ना सहित आसपास के जिलों के दवा कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि नियंत्रित दवाओं की असामान्य खरीद-बिक्री करने वाले अन्य थोक एवं फुटकर दवा प्रतिष्ठानों की भी जांच की जा सकती है। विशेष जांच दल में पन्ना की औषधि निरीक्षक महिमा जैन, छतरपुर के औषधि निरीक्षक अजीत जैन, सतना की औषधि निरीक्षक प्रियंका चौबे तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय, पन्ना का स्टाफ शामिल रहा।
