मक़सूद अली, ब्यूरो चीफ, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT:

मराठी फिल्म जगत में अपनी अलग पहचान बनाने वाले यवतमाल के युवा निर्देशक, लेखक और अभिनेता प्रीतम एस. के. पाटील की बहुचर्चित फिल्म ‘घबाडकुंड’ इन दिनों पूरे महाराष्ट्र के सिनेमाघरों में प्रदर्शित हो रही है और दर्शकों का उत्साहजनक प्रतिसाद प्राप्त कर रही है। इसी संदर्भ में शनिवार को यवतमाल स्थित शासकीय विश्रामगृह में एक विशेष पत्रकार सम्मेलन आयोजित किया गया।
पत्रकारों से बातचीत में प्रीतम पाटील ने बताया कि फिल्म का मुख्य संदेश है: “लालच इंसान को अंततः विनाश की ओर ले जाती है।” उन्होंने बताया कि फिल्म की शूटिंग खेड शिवापुर में 21 हजार वर्गफुट के भव्य सेट पर की गई है, जिसमें रहस्य, रोमांच, लोककथा और साहस का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
यवतमाल में प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने वाले प्रीतम पाटील ने एमसीए (सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग) की डिग्री हासिल की है। आईटी क्षेत्र में बेहतर संभावनाओं के बावजूद उन्होंने फिल्म जगत को अपना करियर चुना। ‘खिचिक’, ‘डॉक्टर डॉक्टर’, ‘धिशक्याऊं’, ‘आल्याड पल्याड’ और ‘घबाडकुंड’ जैसी पांच फिल्मों का निर्देशन कर वे विदर्भ के पहले युवा निर्देशक बन गए हैं, जिन्होंने यह उपलब्धि हासिल की है।
फिल्म की अभिनेत्री वैष्णवी कल्याणकर ने कहा कि ‘घबाडकुंड’ मां के प्रेम और उसकी गहराई को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को यह फिल्म अवश्य देखनी चाहिए। साथ ही उन्होंने मीडिया को कलाकारों और दर्शकों के बीच सेतु बताया।
डॉ. रसिक कदम निर्मित इस फिल्म में देवदत्त नागे, कुशल बद्रिके, संदीप पाठक, शशांक शेंडे, प्राजक्ता हणमघर, स्मिता अंजुटे, वैष्णवी कल्याणकर और गढ़चिरौली के युवा अभिनेता साहिल अन्नादे प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे।
फिल्म की एक विशेषता यह भी है कि इसमें विदर्भ के कई कलाकारों और तकनीशियनों को अवसर दिया गया है। यवतमाल के स्टिल फोटोग्राफर ऋषिकेश गोळे, अमरावती के लेखक अक्षय धर्मपाल, अकोला की सहायक निर्देशक राजश्री देशपांडे और वर्धा के सहायक निर्देशक वैभव दुधकोले ने फिल्म निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
पत्रकार सम्मेलन में निर्देशक प्रीतम पाटील, अभिनेत्री वैष्णवी कल्याणकर सहित विलास झट्टे, प्रीति दाढे, मयूरी पाटील, साहिल अन्नादे, अक्षय धर्मपाल, प्रा. पंढरी पाठे, सचिन मनवर और कृष्णा पुसनाके समेत अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
यवतमाल की मिट्टी में पले-बढ़े एक युवा का यह सफर न केवल जिले बल्कि पूरे विदर्भ के लिए गौरव का विषय बन गया है।
