डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 15 लाख की ठगी का प्रयास नाकाम, पुलिस की सतर्कता से युवक बचा साइबर फ्रॉड से | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

जुन्नारदेव। लखपति कॉलोनी निवासी 20 वर्षीय सानू कुमार महोबिया डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की जा रही साइबर ठगी का शिकार होने से बाल-बाल बच गया। युवक के मोबाइल पर +92 सीरीज से शुरू होने वाले 2-3 व्हाट्सएप नंबरों से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए युवक को डराया-धमकाया और उसकी बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड की जानकारी तथा स्कैनर के माध्यम से भुगतान करने की मांग की। साथ ही करीब 15 लाख रुपये खाते में जमा कराने का दबाव भी बनाया।

घटना से घबराए युवक और उसके परिजन तत्काल जुन्नारदेव थाना पहुंचे, जहां ड्यूटी पर मौजूद एसआई मुकेश डोंगरे को पूरी जानकारी दी। इसके बाद थाना प्रभारी निरीक्षक जे. मसराम को मामले से अवगत कराया गया।

एसआई मुकेश डोंगरे ने व्हाट्सएप कॉल करने वाले नंबरों की जांच की, जो +92 कंट्री कोड के पाए गए। उन्होंने युवक और उसके परिजनों को बताया कि +92 पाकिस्तान का कंट्री कोड है और साइबर ठग अक्सर ऐसे नंबरों से व्हाट्सएप कॉल कर पुलिस या अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की फोटो प्रोफाइल पर लगाकर लोगों को डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाते हैं। इसके बाद वे यूपीआई, फोनपे, बैंक खाते या क्यूआर स्कैनर के माध्यम से पैसे ट्रांसफर कराने का प्रयास करते हैं।

इसके बाद एसआई मुकेश डोंगरे ने स्वयं उस नंबर पर व्हाट्सएप कॉल कर बात की। जैसे ही सामने वाले व्यक्ति को पता चला कि असली पुलिस पीड़ित के साथ है, उसने तुरंत कॉल काट दिया। दोबारा कॉल करने पर उसने फोन उठाना बंद कर दिया।

पूछताछ के दौरान युवक ने बताया कि पुलिस द्वारा बाजारों, सार्वजनिक स्थानों और सोशल मीडिया के माध्यम से चलाए जा रहे साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान की जानकारी मिलने के कारण उसने बिना देर किए थाना पहुंचकर पुलिस से संपर्क किया। इसी जागरूकता के चलते वह साइबर ठगी का शिकार होने से बच गया।

युवक ने पुलिस का आभार व्यक्त करते हुए लोगों से अपील की कि यदि किसी भी व्यक्ति को डिजिटल अरेस्ट, पुलिस अधिकारी या अन्य सरकारी एजेंसी के नाम पर धमकी भरे कॉल आएं, तो घबराएं नहीं, किसी भी प्रकार की बैंकिंग या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और तुरंत नजदीकी पुलिस थाना या साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।

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