अहमद रज़ा, चुनार/मिर्ज़ापुर (यूपी), NIT:

डिजिटल इंडिया के दौर में सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मिर्ज़ापुर के चुनार पासपोर्ट कार्यालय से सामने आए एक मामले में एक युवक को ऑनलाइन अपॉइंटमेंट मिलने के बावजूद बिना सत्यापन के वापस लौटा दिया गया।

मामला 2 जुलाई 2026 का है। गोरखपुर निवासी एक युवक ने पासपोर्ट बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। आवेदन के बाद सिस्टम द्वारा उसे चुनार पासपोर्ट कार्यालय, मिर्ज़ापुर में 2 जुलाई 2026 की अपॉइंटमेंट तिथि आवंटित की गई।
युवक निर्धारित तिथि पर सुबह गोरखपुर से चुनार पहुंचा। घंटों इंतजार के बाद जब उसकी बारी आई, तो कार्यालय के अधिकारियों ने यह कहते हुए उसका सत्यापन करने से इनकार कर दिया कि वह गोरखपुर का निवासी है, इसलिए उसका सत्यापन यहां नहीं हो सकता।
युवक ने सवाल उठाया कि यदि उसका सत्यापन चुनार कार्यालय में नहीं होना था, तो ऑनलाइन सिस्टम ने उसे यहीं की अपॉइंटमेंट क्यों जारी की? इस सवाल का कार्यालय के कर्मचारियों के पास कोई स्पष्ट उत्तर नहीं था।
इसके बाद युवक ने स्थानीय प्रशासन को मामले की जानकारी दी। प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे, लेकिन पासपोर्ट कार्यालय के कर्मचारियों ने अपनी असमर्थता जताते हुए कहा कि इस संबंध में लखनऊ पासपोर्ट कार्यालय से संपर्क किया जाए, क्योंकि उन्हें इस विषय की जानकारी नहीं है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि क्षेत्राधिकार के कारण सत्यापन संभव नहीं था, तो ऑनलाइन सिस्टम ने चुनार कार्यालय की अपॉइंटमेंट क्यों जारी की? युवक का समय, यात्रा पर खर्च हुआ पैसा और मानसिक परेशानी—इन सबकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या संबंधित विभाग इस मामले में जवाबदेही तय करेगा, या फिर आम नागरिक इसी तरह परेशान होते रहेंगे?
