रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी/पंकज बड़ोला, झाबुआ (मप्र), NIT:

झाबुआ जिले सहित थांदला, राणापुर और झाबुआ नगर में शुक्रवार को मोहर्रम का पर्व पूरी अकीदत, श्रद्धा और भाईचारे के साथ मनाया गया। प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था के बीच ताज़ियों के जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से निकाले गए।

थांदला में दोपहर से ही जामा मस्जिद, गांधी चौक, बोहरा मोहल्ला, गवली मोहल्ला, आज़ाद चौक, पिपली चौराहा, भोई मोहल्ला और अंबे माता चौराहे सहित विभिन्न मार्गों से ताज़ियों का जुलूस निकला। मातमी धुनों और “या हुसैन” की सदाओं के बीच हजारों अकीदतमंद जुलूस में शामिल हुए। जुलूस पद्मावती नदी तट पहुंचा, जहां ताज़ियों पर आब-ए-ज़मज़म का पवित्र जल छिड़ककर इस्लामी परंपरा के अनुसार रस्में अदा की गईं। इसके बाद ताज़ियों को वापस इमामबाड़ों में रख दिया गया। राणापुर और झाबुआ में भी इसी प्रकार मोहर्रम के जुलूस निकाले गए।
हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल
थांदला के भोई मोहल्ले में मोहर्रम के जुलूस के दौरान गंगा-जमुनी तहज़ीब की सुंदर तस्वीर देखने को मिली। ताज़ियों के स्वागत में बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों ने सड़क पर लेटकर ताज़ियों के नीचे से गुजरने की परंपरा निभाई तथा अगरबत्ती और प्रसाद अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस अवसर पर नगर ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहां मोहर्रम केवल मातम का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश भी है।
प्रशासन रहा पूरी तरह मुस्तैद
पूरे आयोजन के दौरान पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। ड्रोन कैमरों से निगरानी की गई। एसडीओपी, तहसीलदार और थाना प्रभारी अशोक कनेश स्वयं पूरे समय जुलूस के साथ मौजूद रहे। राजस्व विभाग और बिजली विभाग की टीमें भी तैनात रहीं, ताकि भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की समस्या न आए।
भारत बैंड के संचालक शेरू भाई ने बताया कि उनकी टीम लगातार दूसरे वर्ष मोहर्रम के अवसर पर थांदला आई है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल मातमी धुनें बजाना नहीं, बल्कि इमाम हुसैन के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना भी है। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई थी, इसलिए उनका संदेश पूरी मानवता के लिए है।
गांधी चौक पर जब बैंड ने “सारे जहाँ से अच्छा, हिंदोस्तां हमारा” की धुन बजाई तो माहौल देशभक्ति और कौमी एकता के रंग में रंग गया। नगर के विभिन्न चौराहों पर छबील, शर्बत, दूध, कोल्ड ड्रिंक, लंगर, खिचड़ा और हलीम का भी व्यापक इंतज़ाम किया गया। मोहर्रम की पहली तारीख से शुरू हुई यह सेवा देर रात तक जारी रही और ताज़ियों के जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए।
