पन्ना पुलिस की बड़ी कामयाबी: ₹7.50 लाख की ऑनलाइन ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के दो शातिर आरोपी यूपी से गिरफ़्तार | New India Times

संदीप तिवारी, ब्यूरो चीफ, पन्ना (मप्र), NIT:

पन्ना पुलिस की बड़ी कामयाबी: ₹7.50 लाख की ऑनलाइन ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के दो शातिर आरोपी यूपी से गिरफ़्तार | New India Times

पन्ना पुलिस ने ‘सेफ क्लिक 2026’ अभियान के तहत ऑनलाइन व्यापार के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक अंतर्राज्यीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद से गिरोह के दो शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने पन्ना के एक मिनी मार्केट व्यापारी से ₹7.50 लाख की धोखाधड़ी की थी।

जस्ट डायल से चुराते थे व्यापारियों का डेटा

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी अमित राजपूत और राम सिंह बेहद शातिर तरीके से वारदात को अंजाम देते थे। आरोपी ‘जस्ट डायल’ जैसी व्यावसायिक वेबसाइटों से व्यापारियों की जानकारी (डेटा) हासिल कर उनसे संपर्क करते थे और खुद को केरल की ‘फॉर्च्यून ट्रेडर्स’ कंपनी का प्रतिनिधि बताते थे।

फर्जी GST और दस्तावेजों के जरिए जीता भरोसा

आरोपियों ने पन्ना के एक व्यापारी से मिनी मार्केट के लिए 25 टन नारियल की सप्लाई का सौदा किया। भरोसा जीतने के लिए उन्होंने व्हाट्सएप पर फर्जी GST नंबर, कूटरचित दस्तावेज और ट्रक चालक की फर्जी पहचान भेजी। व्यापारी उनके झांसे में आ गया और आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खाते में ₹7.50 लाख ट्रांसफर कर दिए। रकम मिलते ही आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए और संपर्क तोड़ दिया।

पुलिस कार्रवाई में ₹4.95 लाख नकद और मोबाइल बरामद

व्यापारी की शिकायत पर पन्ना पुलिस ने साइबर सेल की मदद से आरोपियों की लोकेशन उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में ट्रैक की और दोनों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से ₹4,95,000 नकद, तीन एंड्रॉयड मोबाइल फोन, कई फर्जी दस्तावेज और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं।

देशभर में 25 से अधिक मामले दर्ज

पूछताछ में पता चला कि यह एक संगठित साइबर ठग गिरोह है। नेशनल क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के अनुसार, गिरोह के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में 25 से अधिक धोखाधड़ी के मामले दर्ज हैं। पन्ना पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और उनसे जुड़े बैंक खातों की भी जांच कर रही है।

पुलिस की अपील

पन्ना पुलिस ने लोगों से अपील की है कि ऑनलाइन व्यापार या किसी भी व्यावसायिक सौदे के दौरान किसी अनजान व्यक्ति के खाते में एडवांस राशि ट्रांसफर न करें। भुगतान करने से पहले कंपनी के GST नंबर, दस्तावेजों और अन्य जानकारियों का आधिकारिक रूप से सत्यापन अवश्य कर लें, ताकि इस तरह की साइबर ठगी से बचा जा सके।

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