मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

मस्जिद आयशा में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता एवं आतंकवाद विरोध विषय पर एक विशेष तकरीर (विचार गोष्ठी) का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में इस्लामी विद्वान मौलाना अब्दुल वाहिद सल्फी, मौलाना अब्दुल कुद्दूस उमरी तथा हाफिज नसीर अहमद (स्टूडेंट, मदीना यूनिवर्सिटी) ने अपने-अपने विषयों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
हाफिज नसीर अहमद ने अपने उद्बोधन में कहा कि मजहब-ए-इस्लाम राष्ट्रीय एकता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि संपूर्ण मानव जाति एक ही मूल से उत्पन्न हुई है, इसलिए दुनिया के सभी इंसान आपस में भाई-बहन हैं। यही राष्ट्रीय एकता की सबसे बड़ी मिसाल है।
उन्होंने अपनी तकरीर में पैगंबर हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तथा इस्लाम धर्म के संबंध में महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू सहित अनेक महान व्यक्तियों के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्लाम शांति, सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे का धर्म है। उन्होंने कहा कि इस्लाम आतंकवाद और हिंसक घटनाओं की घोर निंदा करता है।
मौलाना अब्दुल कुद्दूस उमरी ने इस्लाम और आतंकवाद विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि जो धर्म अमन और शांति का संदेश देता हो, वह निर्दोष और बेगुनाह लोगों की हत्या, भय तथा आतंक का समर्थन नहीं कर सकता। उन्होंने कुरआन की एक आयत का हवाला देते हुए कहा कि जिसने किसी एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या की, मानो उसने पूरी मानवता की हत्या कर दी, और जिसने किसी एक व्यक्ति की जान बचाई, मानो उसने पूरी इंसानियत को बचा लिया।
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश कुछ आतंकवादी संगठन, जैसे अल-कायदा, ISIS तथा अन्य कट्टरपंथी समूह, इस्लाम के नाम का दुरुपयोग करते हैं। ये संगठन अपने राजनीतिक और हिंसक उद्देश्यों को धार्मिक रंग देकर लोगों को गुमराह करते हैं। इनके कृत्यों से इस्लाम और मुसलमानों की छवि को नुकसान पहुंचता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे कार्य न तो कुरआन की शिक्षाओं के अनुरूप हैं और न ही हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शिक्षाओं के। इस्लाम का मूल संदेश अमन, शांति और मानवता है।
कार्यक्रम में मौलाना अब्दुल वाहिद सल्फी ने सभी इंसानों की बराबरी और समानता पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम के अंत में मोहम्मद ताहिर ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य समाज में भाईचारा, आपसी सद्भाव, राष्ट्रीय एकता तथा शांति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।
इस अवसर पर जामा मस्जिद कमेटी के सदर गौहर जमाल शाह, सेक्रेटरी असलम अब्दाली, पूर्व प्रिंसिपल साबिर अली, निसार खान, जी.एस. खान, रफीक खान, जमील अहमद, आरबी कुरैशी, माजरी मस्जिद से हाजी मोहम्मद शाहिद, ईदगाह मस्जिद से मजीद खान, आयशा मस्जिद से मोहम्मद रफी शेख, इनायतुल्लाह, यूसुफ तबरेज, मोहम्मद इसराइल, हाफिज फारूक, हाफिज नूरुल हक, मौलाना आदिल सहित सैकड़ों महिला, पुरुष एवं बच्चे उपस्थित रहे।
