विवेक जैन, ब्यूरो चीफ, बागपत (यूपी), NIT:

कठिन परिस्थितियों से जूझकर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करने वाली राकेश राणा आज महिला सशक्तिकरण का एक प्रेरणादायक चेहरा बन चुकी हैं। उनके द्वारा तैयार किया जाने वाला ‘राणा अचार’ दिल्ली-एनसीआर सहित देश के विभिन्न राज्यों में अपनी खास पहचान बना चुका है। शुद्धता, पारंपरिक स्वाद और घरेलू गुणवत्ता के चलते उनके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।
राकेश राणा का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। विवाह के करीब डेढ़ वर्ष बाद ही पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और सिलाई-कढ़ाई से शुरुआत करते हुए परिवार का पालन-पोषण किया। लगभग चार वर्ष पूर्व उन्होंने घर से अचार बनाने का कार्य शुरू किया, जो आज एक सफल घरेलू उद्योग का रूप ले चुका है।
राकेश राणा बताती हैं कि अचार बनाने की कला उन्हें अपनी दादी रगबीरी देवी से विरासत में मिली है। पारंपरिक स्वाद को बरकरार रखते हुए वह आज भी मसाले स्वयं तैयार करती हैं, जिससे उत्पादों में शुद्धता और गुणवत्ता बनी रहती है।
वर्तमान में ‘राणा अचार’ के अंतर्गत आम, मिक्स, मिर्च की विभिन्न किस्में, आंवला, करेला, कटहल, नींबू, हींग, करौंदा, अदरक, इमली, हल्दी और मेथी के अचार के साथ-साथ चार प्रकार की चटनियां भी तैयार की जा रही हैं। स्वच्छता का विशेष ध्यान रखते हुए वह सात महिला सहयोगियों के साथ इस कार्य को संचालित कर रही हैं।
जाट कॉलेज, बड़ौत से स्नातक राकेश राणा का कहना है कि उनके उत्पादों की कोई शाखा नहीं है। सभी अचार घर से तैयार कर देशभर में कोरियर के माध्यम से भेजे जाते हैं। उनके पुत्र अजय तोमर भी इस कार्य में सहयोग कर रहे हैं। बड़ौत-बुढ़ाना रोड स्थित उनके निवास पर दूर-दराज से लोग अचार खरीदने भी पहुंचते हैं।
संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास की यह प्रेरक कहानी आज कई महिलाओं के लिए आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

