अशफ़ाक क़ायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:

राजस्थान की राजनीति में आने वाले दिनों में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस, दोनों प्रमुख दलों के भीतर संभावित फेरबदल की चर्चाओं ने नेताओं की धड़कनें तेज़ कर दी हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी राजस्थान दौरों के बाद राजनीतिक समीकरणों में निर्णायक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना प्रबल है। अशोक गहलोत का प्रभाव अब कमजोर पड़ता नज़र आ रहा है, जबकि हाईकमान सचिन पायलट को आगे बढ़ाकर आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को मजबूती देने की रणनीति पर काम कर रहा है। प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को भी बदले जाने की चर्चा है, हालांकि उन्हें संगठन में अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। वहीं, प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा को भी बदले जाने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि हाईकमान अब प्रभारी सचिवों की रिपोर्ट को ज्यादा अहमियत दे रहा है, जिससे गहलोत की स्थिति कमजोर हुई है।
दूसरी ओर, भाजपा में भी संगठन और सरकार स्तर पर बदलाव की आहट है। लंबे समय से खाली पड़े संगठन महामंत्री के पद पर संघ की अनुशंसा से नियुक्ति के बाद संगठन में सक्रियता बढ़ी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के स्थान पर नए चेहरे को लाने की अटकलें भी तेज हैं, हालांकि अंतिम निर्णय शीर्ष नेतृत्व के हाथ में है। साथ ही, केंद्रीय मंत्रिमंडल विस्तार में राजस्थान कोटे में भी बदलाव संभव है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ को भी बदले जाने की चर्चा है। हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में सतीश पूनिया और अल्का गुर्जर को टिकट देकर पार्टी ने जाट और गुर्जर समाज को साधने की कोशिश की है। इसके साथ ही, परंपरागत राजपूत मतदाताओं की नाराजगी दूर करने के प्रयास भी तेज किए जा सकते हैं।
कुल मिलाकर, राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में बड़े स्तर पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है। जहां अशोक गहलोत का प्रभाव घटता दिख रहा है, वहीं वसुंधरा राजे की सक्रियता और भूमिका बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। आने वाले दिनों में इन संभावित बदलावों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
