तीन महीने से अटकी वृद्धावस्था पेंशन, 84 वर्षीय बुजुर्ग कबाड़ बीनने को मजबूर | New India Times

मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

तीन महीने से अटकी वृद्धावस्था पेंशन, 84 वर्षीय बुजुर्ग कबाड़ बीनने को मजबूर | New India Times

महंगाई के इस दौर में वृद्धजनों के लिए जीवन यापन और भी कठिन होता जा रहा है। जुन्नारदेव सहित ग्रामीण अंचल दातलावादी क्षेत्र के सैकड़ों बुजुर्ग सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर निर्भर हैं, लेकिन पिछले तीन महीनों से पेंशन राशि नहीं मिलने के कारण उनकी स्थिति दयनीय हो गई है।
बताया जा रहा है कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत मिलने वाली 600 रुपये मासिक पेंशन ही इन बुजुर्गों के लिए जीवन का मुख्य सहारा है। बढ़ती महंगाई के बीच इतनी कम राशि में राशन और दवाइयों का खर्च उठाना पहले ही मुश्किल था, वहीं अब समय पर भुगतान न होने से संकट और गहरा गया है। हितग्राहियों का कहना है कि न केवल पेंशन का नियमित भुगतान जरूरी है, बल्कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इसकी राशि बढ़ाने पर भी सरकार को विचार करना चाहिए।
ग्रामीणों के अनुसार जिले के हजारों हितग्राही पिछले तीन महीनों से पेंशन का इंतजार कर रहे हैं। भीषण गर्मी में बुजुर्ग बैंक और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उनके खातों में राशि नहीं पहुंच रही है। अधिकारियों का कहना है कि फरवरी-मार्च में पेंशन का भुगतान किया गया था, लेकिन उसके बाद राज्य स्तर पर तकनीकी समस्याओं के कारण भुगतान अटक गया है।
दातलावादी की 84 वर्षीय राधा यादव ने बताया कि वह पूरी तरह पेंशन पर निर्भर हैं। पिछले तीन-चार महीनों से राशि नहीं मिलने के कारण अब उन्हें पेट भरने के लिए इस उम्र में भी कबाड़ बीनने जैसा कठिन काम करना पड़ रहा है।
वहीं 66 वर्षीय सुंदरलाल धुर्वे भी पेंशन के लिए परेशान हैं। वह लगातार बैंक और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। उनका कहना है कि वृद्धावस्था पेंशन ही उनका मुख्य सहारा है, लेकिन इसका नियमित भुगतान नहीं हो रहा। महंगाई के इस दौर में राशि भी अपर्याप्त है, जिससे जीवन यापन करना बेहद मुश्किल हो गया है।
स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन से जल्द पेंशन भुगतान सुनिश्चित करने और राशि बढ़ाने की मांग की है, ताकि बुजुर्गों को राहत मिल सके।

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