अतीश दीपंकर, ब्यूरो चीफ, पटना (बिहार), NIT:

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों, गयाजी, राजगीर और नालंदा को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं विकसित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इन स्थलों पर चल रही सभी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए और बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाए।
मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि मां मुंडेश्वरी मंदिर, करकटगढ़ जलप्रपात और राजगीर के लिए अनुदानित दर पर हेलिकॉप्टर सेवा शुरू की जाए। साथ ही वाल्मीकिनगर के लिए सप्ताहांत (शनिवार-रविवार) में रियायती वायुसेवा भी जल्द प्रारंभ की जाए।
पर्यटकों की सुविधा के लिए पटना से ‘एंड-टू-एंड’ सेवा बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम द्वारा शुरू की जाएगी, जिससे यात्रियों को एकीकृत यात्रा अनुभव मिल सके।
मुख्यमंत्री ने विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर परियोजनाओं को शीघ्र अंतिम रूप देकर कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए। राजगीर को उसकी ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्ता के अनुरूप “ग्लोबल सेंटर ऑफ स्पिरिचुअल लर्निंग” के रूप में विकसित किया जाएगा।
नालंदा की विश्व धरोहर पहचान को और सशक्त करते हुए उसे “ग्लोबल नॉलेज एंड कल्चरल डेस्टिनेशन” के रूप में पुनर्स्थापित करने के लिए विशेष एकीकृत पैकेज तैयार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश और प्रबंधन सुधार के लिए पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा। पावापुरी मंदिर परिसर के समग्र विकास के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाएगी।
स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए ग्रामीण पर्यटन योजनाएं शुरू की जाएंगी। साथ ही ‘होमस्टे’ नीति को बड़े पैमाने पर लागू कर पर्यटकों को बिहार की पारंपरिक मेहमाननवाजी का अनुभव कराया जाएगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार अध्यात्म, इतिहास और संस्कृति की धरोहर रहा है। इन पहलों से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों सहित पर्यटन विभाग के प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित
