जंगल में महिला ने दिया नवजात को जन्म, आरोग्य केंद्र पर मिला ताला; स्वास्थ्य सुविधाओं पर उठे सवाल | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

नेपानगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत मांडवा में शुक्रवार सुबह एक चिंताजनक मामला सामने आया। प्रसव पीड़ा होने पर मांडवा निवासी 35 वर्षीय मीराबाई, पति भूलसिंह, ने जंगल में ही एक नवजात शिशु को जन्म दिया। प्रसव के बाद महिला लंबे समय तक जंगल में बेहोश अवस्था में पड़ी रही। इस घटना ने क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं और व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार महिला के साथ उसकी 3-4 वर्ष की बेटी भी मौजूद थी। इसी दौरान वहां से गुजर रहे मांडवा निवासी एकलव्य भारतीय और उनकी मां किरणबाई किशोर की नजर महिला पर पड़ी। दोनों ने मानवता का परिचय देते हुए महिला को तत्काल आरोग्य केंद्र मांडवा (बोमलियापाठ) पहुंचाया, लेकिन वहां ताला लगा मिला। इसके बाद महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उसका प्राथमिक उपचार किया। महिला की स्थिति को देखते हुए बाद में उसे जिला अस्पताल बुरहानपुर रेफर कर दिया गया।

एकलव्य भारतीय ने बताया कि मांडवा का आरोग्य केंद्र बने लगभग पांच वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज तक वहां पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। उनका आरोप है कि केंद्र अधिकांश समय बंद रहता है और यहां नियमित रूप से चिकित्सकीय सेवाएं नहीं मिल पातीं। उन्होंने बताया कि भवन तो बना दिया गया है, लेकिन बिजली, पानी, पलंग, कुर्सी तथा अन्य आवश्यक संसाधनों का अभाव है। उपचार संबंधी उपकरणों की कमी के कारण मरीजों को पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पाती हैं।

इस मामले को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता अजयसिंह रघुवंशी ने प्रदेश सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार और जनप्रतिनिधि विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने कहा कि जिले के कई क्षेत्रों में लोग मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि विकास के दावे लगातार किए जा रहे हैं।

रघुवंशी ने कहा कि संबंधित आरोग्य केंद्र में एक महिला डॉक्टर पदस्थ हैं, लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उन्हें पंचायत भवन के पास संचालित स्वास्थ्य केंद्र से सेवाएं देनी पड़ती हैं। उनका कहना है कि पर्याप्त संसाधनों और सुरक्षा व्यवस्था के बिना किसी महिला डॉक्टर से जंगल क्षेत्र स्थित केंद्र में नियमित सेवाएं देना व्यावहारिक नहीं है।

उन्होंने जिले में स्वास्थ्य कर्मियों और डॉक्टरों की कमी का मुद्दा उठाते हुए मांग की कि रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्तियां की जाएं। साथ ही बीयूएमएस और बीएएमएस चिकित्सकों को भी स्वास्थ्य संस्थानों में नियुक्त कर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाए, जिससे आम जनता को बेहतर उपचार मिल सके और योग्य चिकित्सकों को रोजगार के अवसर प्राप्त हों।

यह घटना ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर करती है और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता की ओर ध्यान आकर्षित करती है।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version