अशफ़ाक़ क़ायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:

राजस्थान के शेखावाटी अंचल में दानदाताओं और समाजसेवियों की परंपरा लंबे समय से क़ायम रही है। इतिहास के पन्नों में जहां बड़े उद्योगपतियों और दानवीरों के नाम दर्ज हैं, वहीं आज भी कई लोग बेशकीमती जमीन सार्वजनिक और धार्मिक कार्यों के लिए समर्पित कर समाज को नई दिशा दे रहे हैं। यह पहल न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि उन लोगों के लिए भी सीख है जो ज़मीन के छोटे-छोटे टुकड़ों के लिए आपसी विवाद में उलझ जाते हैं।
सीकर जिले में भी समय-समय पर ऐसी प्रेरक घटनाएं सामने आती रही हैं। बेसवा गांव में दो मुस्लिम भाइयों ने सरकारी अस्पताल निर्माण के लिए कीमती जमीन दान दी, जिस पर आज अस्पताल संचालित है। वहीं फतेहपुर में हाजी दाऊद पीनारा द्वारा महिला कॉलेज के लिए दी गई जमीन पर सरकारी महिला कॉलेज स्थापित हुआ है। हाल ही में गुवाला गांव में चार माली भाइयों ने ईदगाह मस्जिद के लिए जमीन दान कर साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की।
इसी कड़ी में अब मंगलूणा गांव के अनवर खान कायमखानी ने जनहित में सराहनीय पहल की है। गांव से पुननी जाने वाले संकरे रास्ते को चौड़ा करने के लिए उन्होंने अपनी निजी जमीन की पक्की दीवार को तोड़कर करीब पांच फीट अंदर नई दीवार बनाई। इस कदम से आम रास्ता चौड़ा हो गया, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में बड़ी सुविधा मिलेगी।
आज जहां जमीन विवादों के हजारों मामले न्यायालयों में लंबित हैं और एक इंच जमीन के लिए भाई-भाई में विवाद देखने को मिलते हैं, ऐसे माहौल में अनवर कायमखानी का यह कदम समाज के लिए प्रेरणा है। उन्होंने इसे सबसे बड़ा “सदका” बताते हुए जनहित को प्राथमिकता दी है।
