जैन भागीरथीबाई वाचनालय में वोटर्स ने बदला सचिव : SIR पर उठ रहे सवाल | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

जैन भागीरथीबाई वाचनालय में वोटर्स ने बदला सचिव : SIR पर उठ रहे सवाल | New India Times

जलगांव जिले की जैन भागीरथीबाई वाचनालय संस्था में आयोजित विशेष सभा में 23 वोटर्स की अर्जी पर हामी भरते हुए मौजूद वोटर्स ने सचिव सुरेश धारीवाल को पद से हटाने का प्रस्ताव पारित कर दिया है। चेयरमैन जगन लोखंडे ने मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी बताते हुए सुरेश धारीवाल को सचिव पद से हटाने की घोषणा की। नए सचिव पारस ललवाणी ने बताया कि लाइब्रेरी में कोई भी नागरिक सदस्य बन सकता है बशर्ते वो आवेदन करे संचालक बोर्ड उस आवेदन को मंजूरी देगा। पारस ने संस्था में किए गए बदलाव के लिए न्याय के पक्ष में सहायता करने वाले मंत्री गिरीश महाजन के प्रति आभार व्यक्त किया।

जैन भागीरथीबाई वाचनालय में वोटर्स ने बदला सचिव : SIR पर उठ रहे सवाल | New India Times

पूर्व सचिव सुरेश धारीवाल ने विशेष सभा को गैर कानूनी करार दिया और कहा कि पिछली सभा का एजेंडा बतौर सचिव मैंने जारी किया उसमें मतदाता वृद्धि का कोई विषय नहीं था। बावजूद नए वोटर बनाए गए और इन्ही के बूते मुझे पद से हटाया गया। पुराने 218 मतदाता है जिनमें 95 को आज की सभा का एजेंडा नोटिस नहीं दिया गया है इस लिए ये सभा गैर कानूनी है हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। विदित हो कि जामनेर तालुका एजुकेशन सोसाइटी संचालित शिक्षा संस्था पर वर्चस्व को लेकर दो संचालक बोर्ड का संघर्ष तब शांत हो गया जब सचिव सुरेश धारीवाल ने मंत्री गिरीश महाजन गुट के सचिव जितेंद्र रमेश पाटिल को संस्था की चाबियों का गुच्छा सौंप दिया। लाइब्रेरी में पारस ललवाणी ने मंत्री जी की सहायता से सुरेश धारीवाल को सचिव पद से हटा दिया।

पारस ललवाणी और सुरेश धारीवाल यह दोनों संस्था परिवार के विकास के लिए मंत्री गिरीश महाजन के साथ एक साथ काम करने का दावा करते है। दोनों संस्थाओं में SIR की तरह वोटर जोड़ने और काटने का रोचक खेल देखा जा सकता है। ज्ञात हो कि उक्त दोनों संस्थाओं में सार्वजनिक रूप से आम चुनाव नहीं करवाए गए है। चैरिटी और सहकारिता विभाग के अधीन संचालित संस्थाओं के प्रशासन को लेकर उच्च न्यायालय के एक फैसले में लिखा गया है कि ” किसी भी संस्था का सभासद उस संस्था का मूल मालिक होता है ” जनता खुलकर बोल रही है कि इन तमाम मसलों का न्याय अब “ईश्वर” करेंगे।

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