इम्तियाज़ चिश्ती, ब्यूरो चीफ, भिंड (मप्र), NIT:

भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है, लेकिन बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में आज भी जातिगत भेदभाव की घटनाएं सामने आ रही हैं। ताज़ा मामला दमोह जिले के हटा थाना क्षेत्र के बिजौरी पाठक गांव से सामने आया है, जहां एक दलित दूल्हे को घोड़ी से उतारकर न सिर्फ अपमानित किया गया, बल्कि उसके साथ और उसके परिजनों के साथ मारपीट भी की गई।
जानकारी के अनुसार, शादी समारोह के दौरान दूल्हा परंपरा के अनुसार घोड़ी पर सवार होकर बारात निकाल रहा था। इसी दौरान गांव के कुछ दबंगों ने उसे घोड़ी से उतार दिया और विरोध करने पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। आरोप है कि हमलावरों ने दूल्हे के परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भी मारपीट की, यहां तक कि महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया।

इस घटना के चलते खुशी का माहौल तनाव में बदल गया और बारात को बीच में ही रोकना पड़ा। पीड़ित पक्ष बारात लेकर दुल्हन के घर जाने के बजाय सीधे हटा थाना पहुंचा, जहां उन्होंने पुलिस को पूरी घटना की जानकारी दी।

घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी सुधीर बेगी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने पीड़ितों के बयान दर्ज कर मामला कायम कर लिया है तथा आरोपियों की तलाश शुरू कर दी गई है। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और एहतियातन पुलिस बल तैनात किया गया है।
गौरतलब है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी दमोह जिले के जोरतला, पतलौनी और सोजना गांवों में इसी तरह दलित दूल्हों को घोड़ी पर चढ़ने से रोके जाने के मामले सामने आ चुके हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में समय-समय पर ऐसी घटनाएं सामाजिक असमानता और सामंती मानसिकता की झलक दिखाती रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता भी बेहद जरूरी है, ताकि समाज में समानता और सम्मान की भावना मजबूत हो सके।

