कटनी में 167 मदरसा छात्रों को जबरन रोके जाने का मामला गरमाया, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से उठी कार्रवाई की मांग | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

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मध्य प्रदेश के कटनी जिले में 167 नाबालिग मदरसा छात्रों को कथित तौर पर जबरन रोके जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस संबंध में कांग्रेस प्रवक्ता अब्बास हफ़ीज़ ने राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को पत्र लिखकर हस्तक्षेप और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

कटनी में 167 मदरसा छात्रों को जबरन रोके जाने का मामला गरमाया, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग से उठी कार्रवाई की मांग | New India Times


अपने पत्र में अब्बास हफीज़ ने बताया कि 11 अप्रैल 2025 को कटनी रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने मानव तस्करी की शिकायत के आधार पर 167 बच्चों को ट्रेन से उतारकर हिरासत में ले लिया था। ये सभी बच्चे बिहार के अररिया और सुपौल जिलों के निवासी बताए जा रहे हैं, जिन्हें अभिभावकों की सहमति से महाराष्ट्र के लातूर स्थित मदरसों में शिक्षा के लिए भेजा जा रहा था।

पत्र के अनुसार, बच्चों के परिजन सूचना मिलने पर कटनी पहुंचे और अधिकारियों को स्पष्ट किया कि बच्चे उनकी अनुमति से जा रहे थे, बावजूद इसके उन्हें बच्चों से मिलने नहीं दिया गया और न ही उन्हें रिहा किया गया। आरोप है कि बाल एवं महिला आयोग और स्थानीय प्रशासन द्वारा बच्चों की उचित देखभाल और भोजन की व्यवस्था भी नहीं की जा रही, जिससे वे मानसिक रूप से परेशान हैं।

बताया गया कि 11 अप्रैल से लेकर 23 अप्रैल तक 13 दिन बीत जाने के बाद भी बच्चों को रिहा नहीं किया गया है। इस पूरे घटनाक्रम को गंभीर बताते हुए अब्बास हफीज़ ने मांग की है कि

1.शिकायत दर्ज कराने वाले और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

2.कटनी के पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर के निलंबन के लिए राज्य सरकार को निर्देश दिए जाएं।

3.सभी बच्चों को तत्काल रिहा कर अभिभावकों को सौंपा जाए।

4.प्रभावित बच्चों और उनके परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।

इस मामले ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और बाल संरक्षण से जुड़े नियमों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग इस मामले में क्या रुख अपनाता है।

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