देरी से पूरे किए जा रहे वाघूर के तालाब प्रोजेक्ट्स में हड़बड़ी के साथ गड़बड़ी | New India Times

नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

देरी से पूरे किए जा रहे वाघूर के तालाब प्रोजेक्ट्स में हड़बड़ी के साथ गड़बड़ी | New India Times

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों की तुलना में मोदी सरकार के डबल इंजिन वाली राज्य सरकारें बुनियादी प्रोजेक्ट्स पूरा करने में निकम्मी साबित हो चुकी है। उत्तर महाराष्ट्र में वाघूर मध्यम सिंचाई प्रोजेक्ट और हतनूर डैम के लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट पूरे 15 साल देरी से चल रहे है। वाघूर डैम विभाग के सैकड़ों अधिकारी , कर्मचारी जो किसी अन्य विभाग में सर प्लस किए जाने चाहिए थे उनको पार्टी विशेष द्वारा राजकीय ऐजेंडे तहत इस्तेमाल किया जा रहा है।

देरी से पूरे किए जा रहे वाघूर के तालाब प्रोजेक्ट्स में हड़बड़ी के साथ गड़बड़ी | New India Times

वाघूर विभाग के बड़े पदों पर मंत्रियों को लाभ पहुंचाने के लिए उठाए और बिठाए जाने वाले अधिकारी सरकार की बेशर्मी का वो हिस्सा है जिसे दिखाने में अब सरकार को भी कोई शर्म नहीं आती। जब भी वाघूर की तिज़ोरी खाली होती है तब सरकार कर्जा लेकर सैकड़ों करोड़ रुपया वाघूर में डालती रहती है। 2011 की लिफ्ट योजना का काम आज भी शुरू है। सिंचाई मंत्री गिरीश महाजन ने वाघूर में 400 करोड़ रुपए डाल दिए हैं। प्रोजेक्ट निर्माण का काफी कंट्रोल केंद्र सरकार के पास चला गया है।

पीवीआर कंपनी द्वारा बनाए जा रहे गुट खेती तालाबों के बारे में गंभीर जानकारियां सामने आ रही हैं। कुल 3800 तालाबों में से 1200 पूरे हो गए हैं जब कि 500 तालाब सीमेंट कांक्रीट से बनाए जाएंगे शेष 1100 तालाब बनाने के लिए चीफ़ इंजीनियर जी एस महाजन ने ऐसा सरकारी मानव संसाधन काम पर लगा रखा है जो सरकार के नहीं बल्कि पीवीआर के लिए काम कर रहा है।

मजे की बात यह है कि पीवीआर कंपनी ने तालाब निर्माण का काम किसी दूसरे को ठेके पर चढ़ा दिया है। आरंभ में तो किसान हि गुट खेती के विरोध में थे उसके बाद किसानों से पैसा उगाही का आरोप चर्चा के केंद्र में आया। वाघूर तालाब योजना की सघन जांच करने पर बड़ा स्कैम उजागर होने की संभावना है।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Gift this article