आशिफ शाह, ब्यूरो चीफ भिंड (मप्र), NIT:
भिंड जिले में इन दिनों विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यशैली को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आम लोगों का आरोप है कि कई सरकारी दफ्तरों में काम योग्यता या नियमों के आधार पर नहीं, बल्कि “पहचान और दबाव” के आधार पर किया जा रहा है। इससे आम नागरिकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि रसूखदार और दबंग लोग आसानी से अपना काम निकलवा लेते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, जब कोई आम व्यक्ति अपनी समस्या या शिकायत लेकर किसी विभाग के कार्यालय पहुंचता है, तो उसे बार-बार चक्कर लगाने के लिए मजबूर किया जाता है। कभी फाइल अधूरी बताकर टाल दिया जाता है, तो कभी “आज नहीं, कल आना” कहकर महीनों तक भटकाया जाता है। कई मामलों में तो आवेदन लेने के बाद भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं होती, बल्कि उसे नजरअाज कर दिया जाता है।
इसके विपरीत, सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों या क्षेत्र के दबंग व्यक्तियों के लिए यही अधिकारी-कर्मचारी तुरंत सक्रिय नजर आते हैं। उनके फोन कॉल तुरंत उठाए जाते हैं और कई बार अधिकारी खुद उनके पास जाकर काम निपटाते हुए देखे जाते हैं। इस दोहरे व्यवहार से आम जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है।
फोन कॉल तक नहीं उठाने की शिकायतें भी आम हो चुकी हैं। नागरिकों का कहना है कि अधिकारियों से संपर्क करना मुश्किल होता जा रहा है, जबकि प्रभावशाली लोगों को हर सुविधा आसानी से मिल जाती है। इससे सरकारी तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जनता का मानना है कि यदि समय रहते इस व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो लोगों का भरोसा सरकारी विभागों से पूरी तरह उठ सकता है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ऐसे मामलों की जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम नागरिकों को भी न्याय मिल सके और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बनी रहे।
