अहमद रज़ा, चुनार/मिर्ज़ापुर (यूपी), NIT:
चुनार की लाइफलाइन कहे जाने वाला गंगा पुल इस समय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। ओवरलोड वाहनों के लगातार बढ़ते दबाव ने पुल की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़कों की गिट्टियां उखड़ चुकी हैं, लेकिन प्रशासन मानो किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
खतरे में जीवनरेखा: रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही वाले इस पुल की हालत बेहद चिंताजनक हो गई है।
नियमों की धज्जियां: प्रतिबंध के बावजूद भारी और ओवरलोड वाहनों का बेखौफ आवागमन लगातार जारी है।
प्रशासनिक उदासीनता: पीडब्ल्यूडी और संबंधित विभागों की चुप्पी लोगों की समझ से परे है।
मरम्मत की दरकार: उधड़ती सड़कों और हिलते जोड़ों के कारण वाहन चालकों में डर का माहौल बना हुआ है।
स्थानीय जनता का कहना है कि यह पुल सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं, बल्कि उनके रोज़गार और जिंदगी का आधार है। लोगों का सवाल है कि क्या प्रशासन तब जागेगा, जब कोई बड़ी अनहोनी हो जाएगी? इस खबर का मकसद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद तोड़ना है, ताकि समय रहते इस ‘जीवनरेखा’ को सुरक्षित किया जा सके।
