मोहम्मद इसहाक मदनी, ब्यूरो चीफ, मैहर (मप्र), NIT:
मैहर जिला के ग्राम पंचायत अमदरा में जिनके कंधों पर गरीबों की मदद की जिम्मेदारी है, वही अब उनकी किस्मत का ठेकेदार बन बैठा है। अमदरा ग्राम में ग्राम सचिव की कथित दबंगई ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पीडित का आरोप है कि सचिव खुलेआम 181 (सीएम हेल्पलाइन) की शिकायत हटवाने के लिए दबाव बना रहा है। और अगर कोई गरीब हिम्मत दिखा दे, तो उसे सीधी धमकी—
“181 हटाओ… नहीं तो गरीबी रेखा से नाम काट दूंगा।”
इतना ही नहीं, सचिव का घमंड यहीं नहीं रुका। उसने साफ शब्दों में कह दिया—
“मैं जनता का नौकर नहीं, सरकार का नौकर हूं।”
वाह रे सिस्टम…! जनता के टैक्स से तनख्वाह लेने वाला अधिकारी जनता को ही आंख दिखा रहा है। और ऊपर से दावा—
“गरीबी रेखा में नाम हम जोड़ते हैं, हम ही काटते हैं।”
यानी गरीबों का हक अब फाइलों में नहीं, बल्कि सचिव की जेब में कैद है!
गांव में दहशत का माहौल है। लोग डर के साए में जी रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि कहीं उनकी आवाज उठाने की कीमत उनके हक छिनने से न चुकानी पड़े।
अब सवाल सीधा है—
क्या प्रशासन इस ‘छोटे साहब’ की बड़ी दबंगई पर लगाम लगाएगा?
या फिर गांधी जी के तीन बंदरों की तरह सब कुछ देखते, सुनते और चुप बैठे रहेगा? इस तानाशाही से परेशान होकर कलेक्टर से तत्काल जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
