जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:
मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) द्वारा 10 मार्च 2026 को ADPO (Assistant District Prosecution Officer) भर्ती की अधिसूचना जारी की गई है, लेकिन पूरे प्रदेश के लिए केवल 17 पदों पर ही भर्ती निकाली गई है।
जबकि 26 अगस्त 2025 को हुई भाजपा सरकार की कैबिनेट बैठक में प्रति न्यायालय एक अभियोजक के सिद्धांत पर 610 नए पदों को स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके बावजूद इतनी कम संख्या में भर्ती निकाले जाने से युवाओं में गहरी नाराज़गी और निराशा देखी जा रही है।
बताया जा रहा है कि पिछली ADPO भर्ती वर्ष 2021 में हुई थी। लगभग 6 वर्षों बाद आई इस भर्ती में भी पदों की संख्या बेहद सीमित होने के कारण वर्षों से तैयारी कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के सपनों और उम्मीदों को झटका लगा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और युवाओं के साथ अन्यायपूर्ण व्यवहार जैसा प्रतीत होती है।
MPPSC द्वारा जारी ADPO भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों के बीच गंभीर असंतोष और चिंता का माहौल है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि सामान्यतः लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में सिलेबस अधिसूचना के साथ ही जारी किया जाता है, लेकिन इस भर्ती में नोटिफिकेशन जारी होने के तीन महीने बाद भी सिलेबस जारी नहीं किया गया है।
इसके अलावा पूरे मध्यप्रदेश के लिए केवल 17 पद घोषित किए गए हैं, जबकि RTI के अनुसार लगभग 300 पद रिक्त बताए गए हैं। ऐसे में इतनी सीमित भर्ती निकालना लाखों युवाओं की उम्मीदों को आहत करने वाला निर्णय माना जा रहा है।
अभ्यर्थियों ने मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग और राज्य सरकार से मांग की है कि ADPO भर्ती में पदों की संख्या बढ़ाई जाए तथा अभ्यर्थियों के लिए निश्चित सिलेबस, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यह केवल एक भर्ती का मुद्दा नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों, वर्षों की मेहनत और उनके भविष्य से जुड़ा सवाल है। इसलिए प्रदेश के युवाओं को उचित अवसर और न्याय मिलना चाहिए।
