संदीप तिवारी, ब्यूरो चीफ, पन्ना (मप्र), NIT:
देवेंद्रनगर में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। लोग इसे सिर्फ संयोग नहीं बल्कि ईश्वर की कृपा और कन्या के देवी स्वरूप का चमत्कार मान रहे हैं।

यहाँ एक मासूम बच्ची लगभग 40 फीट गहरे सूखे कुएँ में करीब 18 घंटे तक फंसी रही, लेकिन जब उसे बाहर निकाला गया तो उसके शरीर पर खरोंच तक नहीं थी। इस घटना को देखने वाले लोग कह रहे हैं — “सच में हमारे भारत में कन्या को देवी का रूप क्यों माना जाता है, यह आज देखने को मिल गया।”
जानकारी के अनुसार, देवेंद्रनगर निवासी एक व्यक्ति की पुत्री 10 मार्च 2026 की रात लगभग 9 बजे अचानक घर से लापता हो गई। परिवार वालों ने पूरी रात बच्ची को हर जगह तलाशा, लेकिन उसका कोई पता नहीं चला। पूरी रात परिवार पर चिंता और दुख का पहाड़ टूट पड़ा।
अगली सुबह परिजनों ने देवेंद्रनगर थाना पहुँचकर थाना प्रभारी सोनम शर्मा को बच्ची के गायब होने की सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत हरकत में आ गई। थाना प्रभारी ने पुलिस टीम बनाकर पूरे मोहल्ले और आसपास के क्षेत्रों में सघन सर्च अभियान शुरू कराया।
काफी देर तक खोजबीन के बाद जब पुलिस टीम मोहल्ले के पास स्थित एक पुराने बरगद के पेड़ के पास पहुँची, तो वहाँ एक खाली पड़े कुएँ में झांकने पर सभी के होश उड़ गए। कुएँ के अंदर बच्ची दिखाई दी।
यह कुआँ लगभग 40 फीट गहरा था। पुलिस टीम ने तुरंत बचाव अभियान चलाकर सावधानीपूर्वक बच्ची को बाहर निकाला। जैसे ही बच्ची को बाहर लाया गया, वहाँ मौजूद लोगों ने राहत की सांस ली।
मौके पर पहुँची मेडिकल टीम ने बच्ची को तुरंत अस्पताल पहुँचाया, जहाँ बीएमओ डॉ. अभिषेक जैन ने उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बच्ची पूरी तरह स्वस्थ पाई गई। वह केवल डरी हुई थी और बोल नहीं पा रही थी। डॉक्टरों ने उसे प्राथमिक उपचार दिया और नए कपड़े भी उपलब्ध कराए।
दोपहर लगभग 3:30 बजे डॉ. अभिषेक जैन ने पुष्टि की कि बच्ची पूरी तरह सुरक्षित है, जिसके बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया।
इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया कि करीब 18 घंटे तक 40 फीट गहरे कुएँ में रहने के बावजूद बच्ची को कोई चोट नहीं आई। लोग इसे भगवान की कृपा और चमत्कार मान रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि हमारे देश में कन्या को देवी का स्वरूप माना जाता है और आज की यह घटना उसी विश्वास को सच साबित करती नजर आई।
हालांकि पुलिस अब भी इस मामले की जांच कर रही है कि बच्ची कुएँ तक कैसे पहुँची और पूरी रात वहाँ कैसे रही।
इस घटना ने एक बार फिर लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि कभी-कभी जीवन में ऐसे चमत्कार भी होते हैं जिन्हें शब्दों में बयान करना मुश्किल होता है।
सच ही कहा गया है —
“जाको राखे साइयां, मार सके न कोय,
बाल न बाँका कर सके, जो जग बैरी होय।”
आज यह दोहा सच होता हुआ दिखाई दिया।
