मंगोलपुरी खुर्द, दिल्ली में अखिल भारतीय मुशायरे का भव्य आयोजन | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, नई दिल्ली, NIT:

राजधानी दिल्ली के मंगोलपुरी खुर्द स्थित साहित्य सदन में खुशहाल एंड प्रियांगी फाउंडेशन के तत्वावधान में उर्दू अकादमी, दिल्ली सरकार, दिल्ली के सहयोग से एक भव्य अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन किया गया। इस गरिमामय आयोजन की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर शैदा अमरोहवी ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में बुरहानपुर मध्य प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर डॉ. जलील बुरहानपुरी की गरिमामय उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। बता दें कि यह आयोजन उर्दू अकादमी, दिल्ली सरकार के सहयोग से संपन्न हुआ।

कार्यक्रम में आमंत्रित सभी शायरों और अतिथियों का पारंपरिक अंदाज़ में गुलपोशी (पुष्पहार पहनाकर)कर स्वागत किया गया, जिससे महफ़िल का माहौल शुरू से ही अदबी रंग में रंग गया। अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में बुज़ुर्ग शायर शैदा अमरोहवी ने मुशायरे के कन्वीनर एजाज़ अंसारी देहलवी तथा प्रख्यात शायर राम श्याम हुसैन देहलवी को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से गैर-मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में उर्दू की शमा रौशन करना न केवल साहसिक, बल्कि अत्यंत सराहनीय कदम है।

मुख्य अतिथि डॉ. जलील बुरहानपुरी ने अपने संबोधन में कहा कि उर्दू केवल किसी एक समुदाय विशेष की भाषा नहीं, बल्कि हिंदू, मुसलमान सहित सभी भारतीय समुदायों की यह साझा विरासत है। यही कारण है कि उर्दू हमारी गंगा-जमुनी तहज़ीब और साझा सांस्कृतिक पहचान की प्रतीक है।

मुशायरे का संचालन दानिश अय्यूबीदिल्ली ने अत्यंत कुशलता से किया, जबकि प्रारंभिक संचालन की जिम्मेदारी असलम बेताब दिल्ली ने निभाई। देश के विभिन्न शहरों जैसे—मुंबई, बुरहानपुर, कानपुर, चांदपुर और गाज़ियाबाद—के साथ-साथ दिल्ली के अनेक ख्यातिप्राप्त शायरों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

जिन प्रमुख शायरों ने अपने कलाम से समां बांधा, उनमें शैदा अमरोहवी, एजाज़ अंसारी देहलवी, डॉ. जलील बुरहानपुरी, नफ़ीस कानपुरी, इक़बाल अंसारी मुंबई, असलम बेताब दिल्ली, दानिश अय्यूबी दिल्ली, अयाज़ अल-एजाज़, आक़िल कुरैशी, पद्म गुप्त, फ़ख़रुद्दीन अशरफ़, इब्राहीम अलवी, एहतराम सिद्दीकी, अंशुल दीवान, जी.के. यदुवंश, एडवोकेट एवं शायर एस.एस. पाराशर, मोहतरमा परवीन शग़फ़, मोहतरमा तुलिका सेठ, मोहतरमा गुल बहार गुल और मोहतरमा हुमा परवीन खान शामिल रहे।

कन्वीनर एजाज़ अंसारी देहलवी और सह-कन्वीनर राम श्याम हुसैन देहलवी के साथ पूरी टीम की अथक मेहनत और समर्पण से सजी इस अदबी महफ़िल की साहित्यिक जगत में व्यापक सराहना की जा रही है। यह आयोजन न केवल शायरी का उत्सव बना, बल्कि सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश भी दे गया।

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