अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल साइबर क्राइम ने आम नागरिकों को साइबर ठगी से बचाने के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। जारी एडवाइजरी में बताया गया है कि इन दिनों साइबर अपराधी खुद को पुलिस अधिकारी, CBI या Interpol का अधिकारी बताकर लोगों को डराकर अवैध वसूली कर रहे हैं।
एडवाइजरी के अनुसार, ठग फोन या व्हाट्सएप कॉल कर यह दावा करते हैं कि संबंधित व्यक्ति की इंटरनेट हिस्ट्री में आपत्तिजनक सामग्री पाई गई है। इसके बाद वे जेल, कोर्ट केस या सोशल मीडिया पर बदनामी की धमकी देकर पैसे की मांग करते हैं। कई मामलों में अपराधी वीडियो कॉल के दौरान पुलिस की वर्दी पहनकर या फर्जी गिरफ्तारी वारंट दिखाकर लोगों को झांसे में लेते हैं और UPI या बैंक ट्रांसफर के माध्यम से रकम ऐंठते हैं।
पुलिस विभाग ने स्पष्ट किया है कि भारतीय पुलिस या कोई भी जांच एजेंसी कभी भी फोन या वीडियो कॉल पर ‘सेटलमेंट’ के लिए पैसे की मांग नहीं करती। वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी जैसा कोई कानूनी प्रावधान नहीं है। साथ ही, कोई भी सरकारी विभाग फोन पर बैंक डिटेल, ओटीपी या निजी जानकारी नहीं मांगता।
यदि किसी को इस प्रकार का कॉल प्राप्त हो तो घबराएं नहीं, तुरंत कॉल काट दें, संबंधित नंबर को ब्लॉक करें और किसी भी स्थिति में पैसे का लेनदेन न करें। एक बार भुगतान करने पर अपराधी बार-बार बड़ी रकम की मांग कर सकते हैं।
साइबर अपराध की सूचना देने के लिए नागरिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं या हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर सकते हैं। भोपाल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 9479990636 पर भी सूचना दी जा सकती है।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज की तुरंत शिकायत करें, ताकि साइबर अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।
