निहाल चौधरी, इटवा/सिद्धार्थ नगर (यूपी), NIT:
स्वास्थ्य विभाग में पटल आवंटन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। रुपये के लेन-देन के आरोपित डॉक्टर को दोबारा निजी अस्पतालों का नोडल अधिकारी बनाए जाने से विभाग में रोष और अफसोस दोनों की स्थिति है।
“जब हो ऐसी मेहरबानी, फिर कैसे न चले मनमानी” जैसी कहावत इस मामले में चरितार्थ होती नजर आ रही है। सितंबर 2023 में निजी अस्पतालों के नोडल अधिकारी रहे डॉ. एम.एम. त्रिपाठी पर अस्पताल पंजीकरण और नवीनीकरण के दौरान रुपये के लेन-देन का वीडियो वायरल हुआ था। मामले में तत्कालीन सीएमओ ने केस दर्ज कराया था और गंभीर आरोपों के चलते शासन को कार्रवाई के लिए पत्र भी भेजा गया था।
बावजूद इसके, आरोपित डॉ. एम.एम. त्रिपाठी को फिर से निजी अस्पतालों (नैदानिक स्थापना) का नोडल अधिकारी बना दिया गया है, जिससे विभाग में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
दरअसल, नैदानिक स्थापना (निजी अस्पताल) और पीसीपीएनडीटी के नोडल अधिकारी रहे डॉ. एम.एम. त्रिपाठी, एक अन्य चिकित्सक और फार्मासिस्ट पर सितंबर 2023 में अस्पताल पंजीकरण/नवीनीकरण के लिए रुपये लेने का वीडियो वायरल हुआ था। यह वीडियो मिठवल ब्लॉक क्षेत्र के एएच हॉस्पिटल से जुड़ा था, जिसे अस्पताल प्रबंधक ने वायरल किया था। वीडियो में तत्कालीन सीएमओ डॉ. विनोद कुमार अग्रवाल का नाम भी पैसे लेने की चर्चा में आया था।
इस मामले में तत्कालीन सीएमओ ने डॉ. एम.एम. त्रिपाठी, फार्मासिस्ट रंजीत कुमार और डॉ. बी.एन. चतुर्वेदी के खिलाफ केस दर्ज कराया था और 5 सितंबर 2023 को डॉ. त्रिपाठी को पटल से मुक्त कर दिया गया था। तत्कालीन डीएम द्वारा कराई गई जांच में आरोपों की पुष्टि भी हुई थी और शासन को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा गया था।
इसके बावजूद 23 दिसंबर 2025 को सीएमओ द्वारा आदेश जारी कर डॉ. एम.एम. त्रिपाठी को फिर से नैदानिक स्थापना (निजी अस्पताल) का नोडल अधिकारी बना दिया गया। शासन स्तर से अभी तक उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है और न ही पटल आवंटन पर रोक लगाई गई है।
इस संबंध में सीएमओ डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने बताया कि नैदानिक स्थापना कार्यक्रम को बेहतर ढंग से संचालित करने के लिए डॉ. त्रिपाठी को नोडल का चार्ज दिया गया है।
