अशफ़ाक़ क़ायमखानी, सीकर/जयपुर (राजस्थान), NIT:
जाट महासभा के तत्वावधान में समाज सुधार का एक महत्वपूर्ण निर्णय हुआ। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर, आडंबर और फिजूलखर्ची को त्याग कर एक अत्यंत सराहनीय निर्णय लिया गया।
आज झुंझुनू जिले के मोहब्बतसरी के पुनिया परिवार (वधू पक्ष) और नयासर के कसवां परिवार (वर पक्ष) के बीच ‘रिंग सेरेमनी’ (सगाई) का आयोजन था। इस अवसर पर महासभा के महासचिव (संगठन) श्री महेन्द्र सिंह जी, श्री रामसिंह जी कसवां और दोनों परिवारों के प्रबुद्ध जन उपस्थित थे।
सगाई के दौरान ही यह विचार साझा किया गया कि जब दोनों पक्षों के परिवार और स्नेही जन यहाँ मौजूद हैं, तो क्यों न बिना किसी दहेज, आडंबर और अतिरिक्त फिजूलखर्ची के इसी समय विवाह की रस्म भी संपन्न कर दी जाए। वर और वधू पक्ष ने इस प्रस्ताव को सहर्ष स्वीकार किया और सगाई के तुरंत बाद सादगी से विवाह की रस्म संपन्न हुई।
मुझे जैसे ही इस प्रेरणादायक पहल की सूचना मिली, मैं स्वयं विवाह स्थल पहुँचा। मैंने नव-दंपत्ति को आशीर्वाद दिया और दोनों परिवारों को इस साहसिक कदम के लिए साधुवाद दिया।
“जाट महासभा ऐसी शादियों का पुरजोर स्वागत और प्रचार करती है जहाँ ‘सगाई के साथ ही विवाह’ संपन्न हो। इससे न केवल समय और धन की बचत होती है, बल्कि समाज से दहेज जैसी कुरीतियों का भी अंत होता है।”
आइए, हम सब मिलकर इस उदाहरण को अपनाएं। शादियों में होने वाले भारी खर्च और दिखावे को छोड़कर सादगी और संस्कारों को महत्व दें। यही हमारे समाज की असली मजबूती है।
