निहाल चौधरी, इटवा/सिद्धार्थ नगर (यूपी), NIT:

विकास क्षेत्र उसका बाज़ार के ग्राम पंचायत तिघरा निवासी मानसी द्विवेदी को दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय द्वारा वनस्पति विज्ञान में पीएचडी (Doctor of Philosophy) की उपाधि प्रदान की गई है।

उन्होंने अपना शोध कार्य “Study of Fungal Pathogens Causing Strawberry Fruit Rots and Their Management by Natural Agents” विषय पर पूर्ण किया। यह शोध वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रो. पूजा सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
पीएचडी सर्वोच्च शैक्षणिक उपाधि है, जो गहन मौलिक शोध (Original Research) और थीसिस के सफल प्रतिरक्षण (Defence) के बाद विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की जाती है। यह डिग्री संबंधित विषय में उच्चस्तरीय विशेषज्ञता का प्रमाण मानी जाती है।
डॉ. मानसी द्विवेदी के शोध में स्ट्रॉबेरी फलों में होने वाले कवकजनित संक्रमण तथा उनके प्राकृतिक प्रबंधन का वैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है। इस शोध से संबंधित 5 शोध-पत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित स्कोपस इंडेक्स (Q1, Q2, Q3 एवं Q4) जर्नल्स में प्रकाशित हो चुके हैं। शोध के दौरान विकसित तकनीक पर पेटेंट भी प्रकाशित हो चुका है, जो वर्तमान में औद्योगिकरण की दिशा में अग्रसर है।
डॉ. मानसी द्विवेदी ने बताया कि माननीय कुलपति प्रो. पूनम टंडन के कुशल नेतृत्व एवं प्रेरणादायी विज़न के कारण विश्वविद्यालय में शोध और नवाचार का उत्कृष्ट वातावरण प्राप्त हुआ, जिसने उन्हें लक्ष्य तक पहुँचने के लिए निरंतर प्रेरित किया।
उन्होंने निदेशक, अनुसंधान प्रकोष्ठ प्रो. दिनेश यादव, नोडल ऑफिसर डॉ. मनिन्द्र कुमार तथा विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान विभाग प्रो. अनिल कुमार द्विवेदी के प्रति उनके सहयोग, मार्गदर्शन और प्रशासनिक सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
शोध के दौरान डॉ. मानसी द्विवेदी ने डॉ. रितेश कुमार राय एवं प्रो. पूजा सिंह के साथ मिलकर ‘ऑर्गेनिक बेरी सेफ गार्ड’ नामक एक प्राकृतिक यौगिक (Natural Compound) विकसित किया है। यह नवाचार विशेष रूप से स्ट्रॉबेरी जैसे शीघ्र नष्ट होने वाले (Highly Perishable) फलों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा।
शोध निष्कर्षों के अनुसार, इस यौगिक के प्रयोग से स्ट्रॉबेरी की शेल्फ-लाइफ में उल्लेखनीय वृद्धि होती है। सामान्यतः 2–4 दिनों में खराब होने वाली स्ट्रॉबेरी सामान्य तापमान पर 10–12 दिन तथा कोल्ड स्टोरेज में 20–25 दिनों तक सुरक्षित रह सकती है। इसके उपयोग से फलों के स्वाद, पोषण एवं गुणवत्ता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
यह यौगिक पूर्णतः प्राकृतिक, पर्यावरण-अनुकूल और सुरक्षित है, जिससे मानव स्वास्थ्य एवं पर्यावरण को कोई हानि नहीं होती। कम लागत में तैयार होने के कारण यह किसानों और व्यापारियों के लिए आर्थिक रूप से अत्यंत लाभकारी है।
उल्लेखनीय है कि डॉ. मानसी द्विवेदी, सिद्धार्थनगर के वरिष्ठ मान्यता प्राप्त पत्रकार कैलाश नाथ द्विवेदी एवं श्रीमती अर्चना द्विवेदी की सुपुत्री हैं। उनकी इस उपलब्धि पर परिवारजनों, शिक्षकों एवं शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
