अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:
रमज़ानुल मुबारक के पवित्र महीने का आग़ाज़ 18 फरवरी से होने जा रहा है। इस अवसर पर टीम जमीअत उलमा मध्यप्रदेश ने एक बार फिर ज़रूरतमंदों को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम शुरू करने की घोषणा की है। संस्था का उद्देश्य है कि लोगों को भीख पर निर्भर करने के बजाय उन्हें रोज़गार से जोड़कर सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर दिया जाए।

टीम जमीअत उलमा मध्यप्रदेश हर वर्ष रमज़ान से पहले ज़रूरतमंद, हुनरमंद और मेहनती महिलाओं व पुरुषों को रोज़गार से जोड़ने का कार्य करती है। मीडिया प्रभारी हाजी मोहम्मद इमरान हारून ने बताया कि रमज़ान रहमत और बरकत का महीना है, जिसमें इबादत के साथ-साथ नेक कार्यों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। इसी भावना के तहत समाज के सहयोग से ज़कात, सदका और हदिया को सही दिशा में उपयोग कर ज़रूरतमंदों को रोज़गार उपलब्ध कराया जाता है।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष भी इस पहल के अंतर्गत करीब 40 ज़रूरतमंद महिलाओं और पुरुषों को रोज़गार से जोड़ा गया था। महिलाओं को सिलाई, घरेलू उद्योग व अन्य स्वरोज़गार से जुड़ी सामग्री वितरित की गई, जबकि पुरुषों को फल-फ्रूट और रमज़ान से जुड़े अन्य छोटे कारोबार शुरू करवाए गए। आज वे सभी लोग अपने पैरों पर खड़े होकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं।

हाजी इमरान हारून ने मुस्लिम समाज से अपील की है कि इस रमज़ान में ज़कात, सदका और हदिया सिर्फ़ वितरण तक सीमित न रहकर किसी ज़रूरतमंद को रोज़गार देने, घर बनाने, कारोबार से जोड़ने, बहन-बेटियों की शादी, नादार बच्चों की शिक्षा, यतीमों की कफालत और बेवाओं की मदद में खर्च किए जाएं।
टीम जमीअत उलमा मध्यप्रदेश ने भरोसा दिलाया है कि इस वर्ष भी समाज के सहयोग से बड़ी संख्या में ज़रूरतमंदों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि रमज़ान का यह पवित्र महीना केवल इबादत का ही नहीं, बल्कि इंसानियत और समाज सेवा का भी पैग़ाम बन सके।
