अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:
राजधानी भोपाल की सड़कों पर बेसहारा पशुओं की भरमार देखने को मिल रही है। शहर के प्रमुख चौराहों एवं रिहायशी इलाकों में गायें और अन्य पशु सड़कों पर कचरा खाते नजर आ रहे हैं, जिससे यातायात और नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम प्रशासन की लापरवाही एक बार फिर उजागर हुई है,—ना गौशालाओं की व्यवस्था दिख रही है और ना ही गौ पालकों की जिम्मेदारी तय हो पा रही है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब पशुओं को गौशालाओं में पर्याप्त चारा-पानी नहीं मिलता, तो वे मजबूरी में सड़कों का रुख करते हैं। यह भी सवाल बना हुआ है कि आखिर ये पशु गौशालाओं से छोड़े जाते हैं या फिर शहर में बाहर से आ जाते हैं। आधुनिक भारत और विकास के दावों के बीच ऐसी तस्वीरें चिंता बढ़ा रही हैं।

नागरिकों ने मांग की है कि आवारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए नगर निगम को रात्रिकालीन सेवा शुरू करनी चाहिए, साथ ही गौशालाओं की नियमित निगरानी और गौ पालकों पर सख्ती से नियम लागू किए जाएं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन समस्याओं को गंभीरता से लेकर कब ठोस कार्रवाई करता है।
