भोपाल स्लॉटर हाउस गोहत्या मामला: भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव का भावुक इस्तीफा, नगर निगम और सरकार पर सवाल | New India Times

जमशेद आलम, ब्यूरो चीफ, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल नगर निगम के जिंसी क्षेत्र में स्थित स्लॉटर हाउस में गोहत्या (गौवध) का मामला दिसंबर 2025 के अंत में सामने आने के बाद लगातार राजनीतिक और सामाजिक विवाद का विषय बना हुआ है। 17 दिसंबर की रात हिंदू संगठनों (जैसे बजरंग दल) ने पुलिस मुख्यालय के पास एक ट्रक रोका, जिसमें करीब 26 टन मांस लदा हुआ था। जांच में इस मांस के गोमांस होने की पुष्टि हुई, जबकि मध्य प्रदेश में गोवंश वध और गोमांस का परिवहन पूरी तरह प्रतिबंधित है।

जांच में सामने आया कि यह मांस भोपाल नगर निगम के आधुनिक स्लॉटर हाउस से निकला था, जो पीपीपी (PPP) मोड पर संचालित है। स्लॉटर हाउस का संचालन ठेकेदार असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा की कंपनी Live Stock Food Processor Pvt. Ltd. को सौंपा गया था। पुलिस ने असलम कुरैशी और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है।

महापौर मालती राय का बयान

भोपाल नगर निगम की महापौर मालती राय ने कहा कि मांस के सैंपल गलत पाए जाने के बाद तत्काल कार्रवाई की गई। उन्होंने पूरे मामले को वर्ष 2022 के टेंडर से जोड़ते हुए कहा कि उस समय नगर निगम में प्रशासक (Administrator) का शासन था और परिषद अस्तित्व में नहीं थी। महापौर का दावा है कि गड़बड़ी उसी दौरान हुई थी।

हालांकि विपक्षी दल कांग्रेस और कई हिंदू संगठनों ने इस बयान को लीपापोती करार दिया है। उनका आरोप है कि स्लॉटर हाउस में गोहत्या का काम कई वर्षों से चल रहा था और ठेकेदार को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था।

वेटनरी डॉक्टर पर कार्रवाई

स्लॉटर हाउस में पदस्थ वेटनरी डॉक्टर बेनी प्रसाद गौर पर आरोप है कि उन्होंने गोमांस को भैंस का मांस बताकर प्रमाणित किया। इस गंभीर लापरवाही के चलते उन्हें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और संभागायुक्त के आदेश पर निलंबित कर दिया गया है। इसके साथ ही स्लॉटर हाउस को सील कर दिया गया है और कुछ रिपोर्ट्स में इसे स्थायी रूप से बंद करने की भी चर्चा है।

यह भी सामने आया है कि ठेकेदार असलम कुरैशी के खिलाफ पहले भी शिकायतें थीं, जिनका उल्लेख मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने किया था, लेकिन उस समय पुलिस द्वारा उन्हें क्लीन चिट दे दी गई थी। अब पूरे मामले की विस्तृत जांच चल रही है।

नगर निगम परिषद बैठक में हंगामा

13 जनवरी 2026 को हुई नगर निगम परिषद की बैठक में इस मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस पार्षदों ने महापौर और मेयर इन काउंसिल (MiC) के इस्तीफे की मांग करते हुए राजनीतिक संरक्षण का आरोप लगाया। इसी दौरान भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव भावुक होकर रो पड़े और उन्होंने इस्तीफा दे दिया।

देवेंद्र भार्गव ने कहा,
“नाक के नीचे इतनी बड़ी गोहत्या कैसे होती रही? अगर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो मैं अपना इस्तीफा वापस नहीं लूंगा।”

उन्होंने इस पूरे मामले पर गहरी शर्मिंदगी भी जताई।
बैठक के दौरान नारेबाजी हुई और कांग्रेस पार्षदों ने वॉकआउट कर दिया।

कानूनन स्थिति

मध्य प्रदेश में गोवंश वध पर मध्य प्रदेश गौवंश वध प्रतिषेध अधिनियम, 2004 के तहत पूर्ण प्रतिबंध है। अधिनियम की धारा 4 के अनुसार किसी भी गोवंश का वध, वध करवाना या वध के लिए प्रस्तुत करना अपराध है। इस अपराध में 1 से 7 वर्ष तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। 2024 में हुए संशोधन के बाद कानून और भी सख्त किया गया है।

निष्कर्ष

यह मामला पूरी तरह “झूठ” कहना कठिन है, क्योंकि कार्रवाई हुई है—गिरफ्तारी, निलंबन और स्लॉटर हाउस सील किया गया है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि केवल एक अधिकारी को निलंबित कर बड़े स्तर की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा रही है। अब सबकी निगाहें जांच पर टिकी हैं कि आगे और कौन-कौन से नाम सामने आते हैं।

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