केंद्रीय विद्यालय महाराजपुर में राजयोग के माध्यम से तनावमुक्त जीवन पर एकदिवसीय कार्यशाला | New India Times

गुलशन परूथी, ग्वालियर (मप्र), NIT:

केंद्रीय विद्यालय महाराजपुर में राजयोग के माध्यम से तनावमुक्त जीवन पर एकदिवसीय कार्यशाला | New India Times

केंद्रीय विद्यालय क्रमांक–4, महाराजपुर में ब्रह्माकुमारीज संस्था द्वारा “तनावमुक्त जीवन – राजयोग के माध्यम से” विषय पर एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

केंद्रीय विद्यालय महाराजपुर में राजयोग के माध्यम से तनावमुक्त जीवन पर एकदिवसीय कार्यशाला | New India Times

यह कार्यशाला विद्यालय के समस्त शिक्षकगणों के लिए आयोजित की गई, जिसका उद्देश्य शिक्षकों को मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और तनावमुक्त जीवन की दिशा में प्रेरित करना था।

कार्यशाला की मुख्य वक्ता गोल्डन वर्ल्ड रिट्रीट सेंटर की संचालिका ब्रह्माकुमारी ज्योति बहन रहीं। उन्होंने अपने उद्बोधन में जीवन को सहज और खुशहाल बनाने के लिए चार महत्वपूर्ण सूत्र बताए।

उन्होंने कहा कि जीवन में सदैव सकारात्मक सोच बनाए रखनी चाहिए, हर परिस्थिति में मुस्कुराहट अपनानी चाहिए, स्वयं पर तथा परमात्मा पर पूर्ण विश्वास रखना चाहिए और मन में किसी के प्रति नफरत या घृणा का भाव नहीं होना चाहिए।

इसी क्रम में सिंगरौली से पधारे ब्रह्माकुमार जीतू भाई ने जीवन प्रबंधन को सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि जीवन में “तोड़ना, मोड़ना और जोड़ना” — इन तीन सिद्धांतों को अपनाना आवश्यक है।

उन्होंने बताया कि गलत संगति और व्यर्थ बातों से अपनी बुद्धि को मुक्त करना चाहिए, परिस्थितियों और समय के अनुसार अपने संस्कारों को ढालना चाहिए तथा हर अवस्था में परमात्मा से अपना संबंध जोड़ना चाहिए। इससे जीवन स्वतः ही तनावमुक्त और आनंदमय बन जाता है।

ब्रह्माकुमार शैलू भाई ने परमात्मा के ध्यान पर विशेष जोर देते हुए कहा कि सच्ची शांति के लिए नियमित अभ्यास आवश्यक है। प्रतिदिन ध्यान करने से मन स्थिर होता है और जीवन में वास्तविक शांति का अनुभव होता है।

कार्यशाला के दौरान सभी शिक्षकों को एक विशेष जीवन मंत्र भी दिया गया—
“कुछ भी हो जाए, धैर्यपूर्वक यही कहना है—जाने दो, कोई बात नहीं, सब अच्छा होगा।”

कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्राचार्य उमेश चंद्र ने कार्यशाला का सार प्रस्तुत करते हुए कहा कि यदि हम अपने संबंधों में समझ बढ़ाएं और स्वीकार करने की कला को अपनाएं, तो जीवन स्वतः ही सहज और सरल हो जाएगा।

कार्यशाला में उपस्थित सभी शिक्षकगणों ने वक्ताओं के विचारों की सराहना की और यह आश्वासन दिया कि वे प्राप्त शिक्षाओं को अपने जीवन में अपनाएंगे तथा भविष्य में भी इस प्रकार की उपयोगी कार्यशालाओं का आयोजन करते रहेंगे।

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