दूषित पानी से मौतों पर मंत्री की बदजुबानी के खिलाफ पत्रकारों में उबाल,प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने पारित किया निंदा प्रस्ताव | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:

मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पेयजल आपूर्ति से हुई मौतों का मामला अब देशव्यापी बहस का विषय बन गया है। देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे वाले इंदौर में गंदा पानी सप्लाई किए जाने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि डेढ़ सौ से अधिक लोग अस्पताल में भर्ती हैं। इस गंभीर लापरवाही के लिए इंदौर नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

सरकार भले ही दावे और सफाई पेश कर रही हो, लेकिन मामला दिल्ली तक गूंज चुका है। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। सत्ताधारी भाजपा के भीतर भी इस घटना को लेकर असंतोष सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती सहित कई वरिष्ठ नेता, मंत्री और विधायक खुले तौर पर अपनी पीड़ा और नाराजगी जाहिर कर चुके हैं, जिससे मोहन यादव सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।

इसी बीच एक राष्ट्रीय चैनल के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा दूषित पानी से हुई मौतों को लेकर पूछे गए सवाल पर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा की गई कथित बदजुबानी ने पूरे देश में राजनीतिक और पत्रकार जगत में आक्रोश पैदा कर दिया है। इस बयान को सत्ताधारी दल के “चाल, चरित्र और चेहरे” को उजागर करने वाला बताया जा रहा है। वहीं विपक्षी कांग्रेस ने राजधानी भोपाल में सरकार और मंत्री के खिलाफ जोरदार मोर्चा खोलते हुए प्रदर्शन किया। इंदौर में कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी को भाजपा सरकार की उदासीनता और दमनकारी रवैये के रूप में देखा जा रहा है।

मंत्री के बयान के विरोध में प्रदेश भर के पत्रकारों में भी रोष व्याप्त है। पत्रकार सुरक्षा एवं कल्याण के लिए प्रतिबद्ध अखिल भारतीय संगठन प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (पंजीकृत) की राष्ट्रीय समिति ने एक ऑनलाइन बैठक कर इस मुद्दे पर चर्चा के बाद निंदा प्रस्ताव पारित किया। संगठन ने मध्यप्रदेश के महामहिम राज्यपाल से नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है।

निंदा प्रस्ताव पर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सैयद खालिद कैस एडवोकेट, डिजिटल मीडिया विभाग की राष्ट्रीय संयोजिका श्रीमती शशि दीप (मुंबई), राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शाकिर मलिक (गुजरात), महिला विभाग की राष्ट्रीय संयोजिका श्रीमती नीना गोयल (दिल्ली), राष्ट्रीय संगठन सचिव मुईन अख्तर खान (हरदा), राष्ट्रीय सचिव श्रीमती रेखा सोलंकी (इंदौर), राष्ट्रीय सचिव मीर मोहम्मद अली (हैदराबाद), राष्ट्रीय सचिव बिल्लू यादव (हरियाणा), डिजिटल मीडिया विभाग के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुनील योगी सहित अन्य पदाधिकारियों ने एकमत से समर्थन दिया।

संगठन ने कहा कि अपनी नाकामी छिपाने के लिए अफसरों पर कार्रवाई करना सरकार की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश है। वहीं मध्यप्रदेश इकाई के पत्रकार डी.एल. चौहान, अरविंद सिंह लोधी, मनोज जोशी, अनिल धोसरीया सहित अन्य ने भी राज्यपाल से मंत्री की तत्काल बर्खास्तगी की मांग दोहराई।

राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सैयद खालिद कैस ने मंत्री के बयान को अमर्यादित और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला करार दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा निष्पक्ष पत्रकारिता का जिस तरह दमन किया जा रहा है, वह निंदनीय है। पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना समय की मांग है, लेकिन सरकार का उदासीन रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए घातक सिद्ध हो रहा है।

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