सुलोचन के नशे में खोता बचपन, कब्रिस्तान बना नशेड़ियों का अड्डा | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज़ खान, भोपाल (मप्र), NIT:


मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मासूम बच्चों का बचपन सुलोचन जैसे नशे की लत और शहर के कब्रिस्तानों के नशेड़ियों का अड्डा बनते जा रहे हालात पर गंभीर चिंता जताई गई है। मध्यप्रदेश सर्वधर्म सद्भावना मंच के सचिव एवं कोमी खिदमतगार भोपाल के हाजी मोहम्मद इमरान ने इस स्थिति को समाज और भविष्य दोनों के लिए बेहद चिंताजनक बताया है।
हाजी मोहम्मद इमरान ने कहा कि एक ओर मासूम बच्चों का बचपन सुलोचन जैसे नशे में बर्बाद हो रहा है, वहीं दूसरी ओर बाल आयोग और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या की ओर आंखें मूंदे हुए हैं। शहर में कई स्थानों पर ऐसे नाबालिग बच्चे खुलेआम नशा करते देखे जा सकते हैं, जो आने वाले समय में समाज के लिए बड़ा संकट बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों का भविष्य उज्ज्वल होना चाहिए, वे आज सड़कों और कब्रिस्तानों में नशे की गिरफ्त में भटकते नजर आ रहे हैं।

सुलोचन के नशे में खोता बचपन, कब्रिस्तान बना नशेड़ियों का अड्डा | New India Times

हाजी इमरान ने बताया कि इस गंभीर विषय को लेकर जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल बाल आयोग को ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन के माध्यम से मांग की जाएगी कि नशे की लत में फंसे बच्चों की पहचान कर उनकी जांच की जाए, साथ ही उनके पालकों और परिवार के मुखियाओं की जिम्मेदारी तय करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि एक विशेष टीम गठित कर ऐसे बच्चों पर पैनी नजर रखी जाए और उन्हें नशे से दूर कर शिक्षा व पुनर्वास के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जाएं।
उन्होंने कब्रिस्तानों की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि यह अत्यंत गंभीर विषय है कि मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड द्वारा गठित कब्रिस्तान सुरक्षा समितियों की मौजूदगी के बावजूद दिन-रात कब्रिस्तानों का इस्तेमाल नशेड़ियों के अड्डे के रूप में हो रहा है। यहां बच्चे और बड़े खुलेआम नशा करते देखे जा सकते हैं, जो न केवल धार्मिक स्थलों की मर्यादा के खिलाफ है, बल्कि सामाजिक पतन का भी प्रतीक है।
हाजी मोहम्मद इमरान ने मांग की कि कब्रिस्तान सुरक्षा समितियां इस पर तत्काल संज्ञान लें और सख्त कार्रवाई करें। साथ ही कब्रिस्तानों में असामाजिक तत्वों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए, सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं, ताकि कब्रिस्तानों को नशेड़ियों के अड्डा बनने से रोका जा सके।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ी और सामाजिक ताने-बाने पर इसके गंभीर दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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